
मुंबई। महाराष्ट्र में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा सकता है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने शनिवार को कहा है कि आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए, जिन्हें इसकी वास्तविक जरूरत है। न्यूज चैनल के एक कार्यक्रम में बोलते हुए सुले ने अपना उदाहरण दिया और कहा- मेरे माता-पिता पढ़े-लिखे हैं, मैं पढ़ी-लिखी हूं, मेरे बच्चे अच्छे स्कूल में पढ़ते हैं। ऐसे में अगर मैं आरक्षण मांगूं तो मुझे शर्म आनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण का उद्देश्य पिछड़े और वंचित तबके के उन बच्चों को अवसर उपलब्ध कराना है, जिन्हें संसाधन और शिक्षा तक समान पहुंच नहीं मिल पाई। अगर चंद्रपुर जैसे इलाके का कोई बच्चा, जिसके पास मेरे बच्चों जैसी सुविधाएं नहीं हैं, मुझसे अधिक प्रतिभाशाली है, तो अवसर उसी को मिलना चाहिए। सुले ने कहा कि आरक्षण को जरूरत और योग्यता दोनों के आधार पर समझा और लागू किया जाना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि क्या जाति आधारित आरक्षण खत्म होना चाहिए, तो उन्होंने इसे बेहद संवेदनशील विषय बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से आग्रह किया है कि इस मुद्दे पर सभी दलों की बैठक बुलाई जाए। सुले का मानना है कि इस तरह की चर्चा केवल विधानसभा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे कॉलेजों, समाजों और सार्वजनिक मंचों तक ले जाना चाहिए, ताकि सभी वर्गों की राय सामने आ सके।




