
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आज बिहार के उन नागरिकों से मुलाकात की, जिन्हें विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग ने कथित तौर पर ‘मृत’ घोषित कर मतदाता सूची से हटा दिया था। ये सभी लोग बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के निर्वाचन क्षेत्र राघोपुर से संबंध रखते हैं। राहुल गांधी ने इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए लिखा- जीवन में बहुत दिलचस्प अनुभव हुए हैं, लेकिन कभी ‘मृत लोगों’ के साथ चाय पीने का मौका नहीं मिला था। इस अनोखे अनुभव के लिए, धन्यवाद चुनाव आयोग!
सातों मतदाताओं- राम इकबाल राय, हरेंद्र राय, लालमुनि देवी, वचिया देवी, लालवती देवी, पूनम कुमारी और मुन्ना कुमार ने राहुल गांधी को विस्तार से बताया कि कैसे उन्हें बिना किसी ठोस कारण के मृत घोषित कर उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पारदर्शिता से बच रहा है, क्योंकि यदि सूचना सार्वजनिक की गई तो उसका पूरा “खेल” उजागर हो जाएगा। मुलाकात के दौरान राजद नेता संजय यादव भी मौजूद रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि जिन 36 लाख मतदाताओं के स्थानांतरण की बात हो रही है, वे कौन लोग हैं। बाद में कांग्रेस ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि यह कोई साधारण लिपिकीय त्रुटि नहीं, बल्कि राजनीतिक मताधिकार से वंचित करने का सुनियोजित प्रयास है। पार्टी के अनुसार, चुनाव आयोग ने मृत, प्रवासी या अन्य श्रेणियों में डाले गए मतदाताओं की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की है। जमीनी स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अनौपचारिक तौर पर कुछ मतदान केंद्रों की आंतरिक रिपोर्ट हासिल कर इन लोगों की पहचान की। कांग्रेस ने बेंगलुरु में ‘वोट चोरी’ के हालिया खुलासे का हवाला देते हुए दावा किया कि बिहार की एसआईआर प्रक्रिया भी गंभीर रूप से समझौता-ग्रस्त है। पार्टी ने कटाक्ष करते हुए कहा- जब जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया जाता है, तो यह लोकतंत्र के ही लिए मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने जैसा है।