
पुणे। पुणे की वैष्णवी हगवाने की आत्महत्या के बाद अब परभणी जिले की 22 वर्षीय पूजा गजानन निरवाल की दर्दनाक मौत ने राज्य में एक और बार दहेज उत्पीड़न और पुलिस की निष्क्रियता को लेकर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। 27 अप्रैल को पुणे के महालुंगे स्थित स्पाइन सिटी सोसायटी में पूजा ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर जान दे दी। हालांकि, उसके माता-पिता का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या है। पूजा के माता-पिता, गणेश और रेखा बोचारे का कहना है कि उनकी बेटी तीन महीने की गर्भवती थी और उसे ससुराल वालों द्वारा लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। परिवार ने दावा किया कि पुलिस इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं कर रही है क्योंकि वे गरीब तबके से आते हैं। रेखा बोचारे ने लोकमत को बताया, “हमें कुछ नहीं चाहिए, सिर्फ अपनी बेटी के लिए न्याय चाहिए। पूजा की शादी 3 दिसंबर 2024 को गजानन निरवाल से हुई थी, जो शेलवाड़ी गांव का रहने वाला है। शादी के बाद वह अपने पति, सास-ससुर, ननद और पति के बच्चों के साथ पुणे में रहने लगी। प्रारंभिक महीनों में संबंध सामान्य रहे, लेकिन जल्द ही दहेज की मांगें शुरू हो गईं। परिवार का आरोप है कि गजानन ने पूजा से कार के लिए 50,000 रूपए लाने को कहा, जिसे पूरा करने से उसके पिता—एक ट्रक चालक—असमर्थ थे। पूजा ने आखिरी बार गुड़ी पड़वा के दिन मायके जाकर अपने माता-पिता को ससुराल में हो रहे दुर्व्यवहार के बारे में बताया था। माता-पिता ने हालात सुधरने की उम्मीद में उसे ससुराल वापस भेज दिया। उसकी मां से अंतिम बातचीत उसी दिन सुबह हुई थी, जब पूजा ने कहा था, “शाम को बात करेंगे। लेकिन कुछ ही घंटों बाद परिवार को उसकी मौत की सूचना मिली। गणेश बोचारे ने ठाणे में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उनका आरोप है कि उन्हें एफआईआर दर्ज कराने के लिए रात 11 बजे तक पुलिस स्टेशन में बैठाया गया और आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने शादी में तीन लाख रुपये खर्च किए और दो लाख रुपये के घरेलू सामान दिए, फिर भी उनकी बेटी को सताया गया। रेखा बोचारे ने भावुक होकर कहा, हम गरीब हैं, इसीलिए हमारी बेटी की मौत को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। इस मामले को लेकर अभी तक किसी भी ससुराल पक्ष के सदस्य की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। पूजा की मौत ने राज्य में एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि गरीब और वंचित वर्ग की महिलाओं को न्याय क्यों नहीं मिलता। सामाजिक संगठनों ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।




