
मुंबई। राज्य में पशुधन आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के लिए ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्यमिता योजना’ में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। इस योजना के अंतर्गत अब मुरघास संयंत्र वितरण में किसान समूहों को शामिल किया गया है, साथ ही वराह (सुअर) पालन व्यवसाय को भी जोड़ा गया है। सोमवार को यह जानकारी पशुसंवर्धन मंत्री पंकजा मुंडे ने दी। पशुसंवर्धन विभाग द्वारा जारी संशोधित शासन निर्णय के अनुसार, मुरघास संयंत्रों के माध्यम से चारा विकास को बढ़ावा मिलेगा और पशुपालकों को स्थिर व किफायती चारा उपलब्ध हो सकेगा। समूह स्तर पर कार्य करने से उत्पादन लागत में कमी आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार व उद्यमिता के नए अवसर उत्पन्न होंगे। नई व्यवस्था के तहत अब व्यक्तिगत लाभार्थियों के साथ-साथ किसान उत्पादक संस्थाएं, किसान उत्पादक कंपनियां, ‘आत्मा’ के अंतर्गत पंजीकृत किसान समूह, महिला आर्थिक विकास महामंडल से जुड़ी सामुदायिक संसाधन केंद्र तथा ‘उमेद’ पंजीकृत संगठन भी इस योजना का लाभ ले सकेंगे। इसके लिए संबंधित संस्थाओं के पास कम से कम 50 सदस्य, 5 लाख रुपये की पूंजी और पिछले तीन वर्षों का लेखा परीक्षण आवश्यक होगा। इस योजना में पहले से ही बकरी, भेड़, गाय, भैंस और कुक्कुट पालन शामिल था, अब इसमें वराह पालन को भी शामिल किया गया है। ‘वराह पालन समूह वितरण योजना’ के तहत 5+1 पशु समूह, बीमा और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं सहित लगभग 2.08 लाख रुपये की परियोजना लागू की जाएगी। इसमें सामान्य वर्ग को 50 प्रतिशत और अनुसूचित जाति-जनजाति के लाभार्थियों को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। योजना में भूमिहीन, छोटे किसान, महिला स्वयं सहायता समूह और शिक्षित बेरोजगारों को प्राथमिकता दी जाएगी। महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत और दिव्यांगों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया गया है। लाभार्थियों के लिए पशुपालन प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है और पशुओं की खरीद स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारियों की निगरानी में की जाएगी। इसके अलावा उद्यमिता विकास के तहत 4 प्रतिशत ब्याज रियायत योजना को भी अब वराह पालन सहित अन्य पशुपालन व्यवसायों पर लागू किया गया है। मंत्री पंकजा मुंडे ने विश्वास जताया कि इन सुधारों से पशुपालन क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।




