
मुंबई। नीति आयोग के दिशानिर्देशों के तहत तैयार किए जा रहे ‘विकसित महाराष्ट्र 2047 विज़न डॉक्यूमेंट’ के प्रारूप को लेकर आज सह्याद्री अतिथिगृह में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विज़न डॉक्यूमेंट की रूपरेखा पर प्रारंभिक चर्चा की गई तथा नागरिकों से सुझाव आमंत्रित करने के निर्देश भी दिए गए। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मुख्य सचिव सुजाता सौनिक, विभिन्न विभागों के सचिव तथा विज़न डॉक्यूमेंट निर्माण में सहयोग कर रही मैकेंज़ी संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में दस्तावेज़ के प्रारंभिक मसौदे का प्रस्तुतीकरण भी किया गया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि यह विज़न डॉक्यूमेंट केवल एक योजनागत दस्तावेज न होकर एक प्रगतिशील, सतत, सर्वसमावेशी और सुशासन पर आधारित क्रियान्वयन योग्य योजना होनी चाहिए। उन्होंने सभी प्रशासनिक अधिकारियों से इसमें सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि “यदि अधिकारी अपने अनुभव और ज्ञान से इसमें योगदान देंगे, तो यह दस्तावेज़ महाराष्ट्र के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक उत्कृष्ट आधार बन सकता है। नीति आयोग द्वारा ‘विकसित भारत 2047’ की जो रूपरेखा तैयार की गई है, उसी के अनुरूप महाराष्ट्र को भी अपना राज्य स्तरीय विज़न डॉक्यूमेंट तैयार करना है। इसका प्रथम प्रारूप 15 अगस्त 2025 तक केंद्र सरकार को और अंतिम रूप 2 अक्टूबर 2025 तक प्रस्तुत किया जाना है। मुख्यमंत्री ने नागरिक सहभागिता पर जोर देते हुए सुझाव दिया कि व्हॉट्सऐप चैटबॉट, ऑनलाइन सर्वेक्षण, जैसे डिजिटल माध्यमों के जरिए आम जनता की राय प्राप्त की जाए। साथ ही उन्होंने विज़न डॉक्यूमेंट के लिए लोगो डिज़ाइन प्रतियोगिता आयोजित करने की भी घोषणा की, जिससे नागरिक भावनात्मक रूप से इस प्रक्रिया से जुड़ सकें। इस बैठक में राज्य की सामाजिक, आर्थिक, अधोसंरचनात्मक और पर्यावरणीय विकास की दिशा तय करने वाले विभिन्न मुद्दों पर भी संक्षिप्त चर्चा हुई। सरकार का उद्देश्य है कि महाराष्ट्र वर्ष 2047 तक देश के सबसे उन्नत और समावेशी राज्यों में शामिल हो।



