
प्रकाश आंबेडकर ने मोदी सरकार पर लगाए “अमेरिका समर्थक” डील के आरोप
पीयूष गोयल का पलटवार — ‘देशहित से कोई समझौता नहीं’
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहां केंद्र सरकार इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता करार दे रहा है। वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर को सीधे तौर पर घेरते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। आंबेडकर ने कहा कि भारत सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की “धमकियों” के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है और यह समझौता पूरी तरह से “अमेरिका समर्थक” और “भारत विरोधी” है। आंबेडकर की यह प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति के उन दावों के बाद आई है, जिनमें कहा गया है कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका व वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हो गया है। इस दावे ने न केवल भारत की ऊर्जा नीति बल्कि कृषि और अर्थव्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए प्रकाश आंबेडकर ने पूछा कि क्या भारत अब रूस से मिलने वाले सस्ते तेल को छोड़कर वेनेजुएला से महंगा तेल खरीदेगा। उन्होंने ट्रंप के दावों का हवाला देते हुए सवाल किया, क्या यह सही है कि भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई है? वेनेजुएला का तेल रूसी तेल की तुलना में काफी महंगा है। ऐसे में भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका कितना बोझ पड़ेगा? उन्होंने सरकार से मांग की कि तेल आयात नीति में संभावित बदलाव पर स्थिति स्पष्ट की जाए।
कृषि क्षेत्र पर खतरे की चेतावनी
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के कृषि पहलुओं पर चिंता जताते हुए आंबेडकर ने कहा कि अमेरिकी कृषि उत्पादों का अधिक आयात भारतीय किसानों के लिए गंभीर संकट बन सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के कार्यबल का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा कृषि पर निर्भर है। अगर अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोल दिए जाते हैं, तो हमारे लाखों किसानों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी,” उन्होंने कहा। आंबेडकर ने सवाल उठाया कि क्या अब भारत सरकार अपनी नीतियां अमेरिका के इशारों पर तय कर रही है, जिससे स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भरता को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
पीयूष गोयल का पलटवार: ‘देशहित से कोई समझौता नहीं’
विपक्ष के इन तीखे आरोपों के बीच केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को सरकार का पक्ष रखा। गोयल ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ हुआ व्यापार समझौता “बेहतरीन” है और इसमें देशहित व जनहित का पूरा ध्यान रखा गया है। गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी भी कृषि और डेयरी सेक्टर के हितों के साथ समझौता नहीं किया है। उनके मुताबिक, यह डील भारतीय उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में नए अवसर खोलेगी और इससे भारतीय निर्यात को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पूरा देश प्रधानमंत्री के इस विजन को समझता है और यह समझौता भारत की अर्थव्यवस्था को लंबे समय में लाभ पहुंचाएगा।



