
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में इस महीने होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गरम हो चुका है। यह चुनाव जहां सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस के लिए सत्ता में बने रहने की चुनौती है, वहीं भारतीय जनता पार्टी के लिए सत्ता हासिल करने का बड़ा मौका माना जा रहा है। पूर्वी बर्दवान के कटवा में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में बड़े राजनीतिक बदलाव का दावा किया। उन्होंने कहा कि 4 मई के बाद पश्चिम बंगाल में “परिवर्तन” निश्चित है। प्रधानमंत्री ने अपनी रैलियों में उमड़ रही भीड़ को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि ऐसा जनसमर्थन उन्होंने अपने गृह राज्य गुजरात में भी नहीं देखा, जो चुनावी परिणामों का संकेत है। प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि यदि राज्य में भाजपा सरकार बनती है, तो पिछले 15 वर्षों के शासनकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए श्वेत पत्र लाया जाएगा। साथ ही, उन्होंने पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत योजना लागू करने का वादा किया, जिससे राज्य के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के मुद्दे पर भी सख्त कार्रवाई का संकेत दिया।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस चुनाव में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने दावा किया है कि राज्य की सभी 294 सीटों पर वही चेहरा हैं और पार्टी की जीत का आधार उनका नेतृत्व ही है। वर्ष 2011 में वाममोर्चा के 34 साल लंबे शासन का अंत कर सत्ता में आईं ममता बनर्जी पिछले 15 वर्षों से लगातार राज्य की सत्ता संभाल रही हैं। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में उनकी सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे हैं। शिक्षा भर्ती घोटाला, नगर निकाय नियुक्तियां और राशन वितरण जैसे मामलों में पार्टी के कई नेता और मंत्री जांच के दायरे में आए हैं। इसके अलावा, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों, विशेषकर कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना, ने भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में सरकारी योजनाएं भी अहम भूमिका निभा सकती हैं। लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री, स्वास्थ्य साथी और युवा साथी जैसी योजनाओं का प्रभाव महिला और युवा मतदाताओं पर देखने को मिल सकता है। पिछले चुनावों में महिला और मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन तृणमूल कांग्रेस के लिए निर्णायक रहा है और इस बार भी यह समीकरण महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। राज्य में चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता सत्ता परिवर्तन का विकल्प चुनती है या मौजूदा सरकार पर ही भरोसा कायम रखती है।




