
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य सरकार शहरी विकास को विकास का ग्रोथ इंजन मानते हुए प्राथमिकता दे रही है, और यदि स्थानीय स्वराज संस्थाएं योजनाबद्ध तरीके से नागरिकों की समस्याओं का समाधान करें, तो उन्हें राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग मिलेगा। वे गुरुवार को पुणे स्थित यशदा में नगर विकास विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे, जिसमें राज्य की सभी महानगरपालिकाओं और नगर परिषदों के आयुक्त एवं मुख्याधिकारी उपस्थित थे। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री व नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे, राज्य मंत्री माधुरी मिसाळ, अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता और प्रधान सचिव डॉ. के.एच.गोविंदराज भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र देश का दूसरा सबसे बड़ा शहरी जनसंख्या वाला राज्य है, जिसमें 450 शहरों में 6 करोड़ लोग रहते हैं। यदि इन शहरों का सुनियोजित और सुंदर विकास हो, तो राज्य की लगभग 50 प्रतिशत आबादी का जीवन स्तर सुधर सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, जलापूर्ति, मलजल प्रबंधन जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देकर योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करना होगा। फडणवीस ने कहा कि नगर निकायों को पारंपरिक दृष्टिकोण से बाहर आकर आधुनिक तकनीक, ई-गवर्नेंस और वित्तीय नवाचार को अपनाना होगा। उन्होंने निजी निवेश को आकर्षित करने, कर वसूली में पारदर्शिता लाने और निधि जुटाने के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने ‘विकसित महाराष्ट्र 2047’ के विजन को साकार करने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों को अनिवार्य बताया।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि कार्यशाला शहरी स्थानीय निकायों की चुनौतियों को समझने और उनका समाधान खोजने के लिए उपयोगी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार शहरों के सर्वांगीण विकास में भागीदार है और स्मार्ट एवं टिकाऊ शहरी नियोजन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), झुग्गी नियंत्रण, पुनर्वापर जल, वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट और बेहतर सार्वजनिक परिवहन की दिशा में प्रयास करने की अपील की। शिंदे ने बताया कि पहले ‘शासन आपल्या दारी’ जैसे कार्यक्रम सफलतापूर्वक लागू किए गए हैं और अब 150 दिनों का नया कार्यक्रम लागू किया जा रहा है, जिसमें निवेश, प्रशासनिक सुधार, स्वच्छता और फील्ड विज़िट जैसे विषयों को महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि सभी शहरी निकाय सामूहिक रूप से कार्य करें, तो राज्य में संतुलित और तेज़ गति से शहरी विकास संभव है।



