
वी बी माणिक
मुंबई। मध्य रेल के मुंबई मंडल में लोकल और मेल-एक्सप्रेस गाड़ियों के लगातार विलंब से चलने के कारण यात्रियों का आक्रोश बुधवार सुबह छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) पर फूट पड़ा। नाराज यात्रियों ने स्टेशन प्रबंधक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए स्टेशन मास्टर का घेराव किया और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे यात्रियों का कहना था कि पिछले करीब छह महीनों से लोकल और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनें रोजाना 25 से 30 मिनट की देरी से चल रही हैं। इसका सीधा असर नौकरीपेशा यात्रियों पर पड़ रहा है। यात्रियों के अनुसार, ऑफिस देर से पहुंचने पर उनकी आधी पगार तक काट ली जाती है, जबकि रेलवे अधिकारियों को पूरी तनख्वाह मिल रही है और वे देरी का कोई ठोस कारण भी नहीं बता रहे हैं। यात्रियों ने आरोप लगाया कि जब से डीआरएम हिरेश मीना ने पद संभाला है, तब से मुंबई मंडल में ट्रेनों की लेटलतीफी और बढ़ गई है। उन्होंने सीनियर डीओएम आदिश पठानिया और डीआरएम मीना पर लापरवाही और काम में उदासीनता के आरोप लगाए। यात्रियों का कहना है कि मुंबई मंडल में लापरवाह अधिकारियों की भरमार हो गई है, जिसका खामियाजा आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। कसारा और कर्जत की ओर से आने वाले प्राइवेट नौकरीपेशा यात्रियों ने बताया कि रोजाना की देरी से उनका कामकाज और पारिवारिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। यात्रियों ने काफी देर तक हंगामा किया और चेतावनी दी कि अगर आठ दिनों के भीतर रेल व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे चक्का जाम जैसा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि इससे पहले कई बार लिखित शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यात्रियों का आरोप है कि रेल प्रशासन अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहा है और हालात दिन-ब-दिन बदतर होते जा रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या रेल प्रशासन इस गंभीर समस्या पर ध्यान देगा या यात्रियों को यूं ही परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।




