
वी. बी. माणिक
मुंबई। मध्य रेलवे के मुंबई मंडल में इन दिनों रेल यात्रियों की परेशानी चरम पर है। लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) और कल्याण जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) और टिकट चेकिंग स्टाफ (टीसी) के कथित मनमाने रवैये से यात्री बेहाल हैं। गर्मी की छुट्टियों में उत्तर भारत जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ के बीच, पहले से टिकट लेकर भी कई यात्री यात्रा नहीं कर पा रहे हैं।
हालात इतने खराब हैं कि जिन यात्रियों ने महीनों पहले दलालों या स्टेशनों से वेटिंग टिकट निकालकर बड़ी मुश्किल से व्यवस्था की थी, वे भी अपनी सीट तक नहीं पहुंच पा रहे। जनरल टिकट लेकर सवार होने वाले कुछ लोग दूसरों की सीटों पर कब्जा कर लेते हैं या गेट पर भीड़ लगाकर पूरी बोगी जाम कर देते हैं। इन अव्यवस्थाओं पर न तो आरपीएफ कार्रवाई करती है और न ही टिकट निरीक्षक हस्तक्षेप करते हैं। यात्रियों का आरोप है कि यह सब मिलीभगत से हो रहा है, जिससे संबंधित अधिकारी आँख मूंदे हुए हैं। शिकायतें लेकर स्टेशन मास्टर तक जाने के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही। सवाल उठता है कि इस स्थिति का जिम्मेदार कौन है—एसीएम, डीसीएम, सीनियर डीसीएम या मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम)? अब तक किसी भी वरिष्ठ अधिकारी ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं दी है। यात्रियों की गुहार और आंसुओं के बीच रेलवे का मौन रहना चिंताजनक है। यात्रियों की मांग है कि वेटिंग टिकटों की बिक्री पर रोक लगाई जाए और जनरल टिकट के नाम पर सीट कब्जाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। आरपीएफ कर्मियों पर यात्रियों से बदसलूकी के आरोप भी लगे हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो वे अपनी ड्यूटी नहीं बल्कि एहसान कर रहे हों। सवाल यह भी उठता है कि सीनियर डीएससी कब इन लापरवाह कर्मियों पर कार्रवाई करेंगे? अब देखना यह है कि क्या मध्य रेलवे के महाप्रबंधक धर्मबीर मीणा इस अव्यवस्था का संज्ञान लेकर कोई ठोस कदम उठाएंगे, या फिर कामचोर कर्मचारियों को प्रोत्साहन और पुरस्कार देकर ही संतुष्ट रहेंगे।




