
चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन ने गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रपति के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में भेजे गए विधेयकों पर राज्यपालों की भूमिका और समयसीमा से संबंधित 14 सवालों के संदर्भ का विरोध करने की अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संदर्भ सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक निर्णय को कमजोर करने की कोशिश है, जिसमें “तमिलनाडु बनाम राज्यपाल” मामले में अदालत ने स्पष्ट किया था कि राज्यपालों को राज्य सरकारों द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने में अनावश्यक विलंब करने का अधिकार नहीं है। स्टालिन ने कहा कि भाजपा सरकार राज्यपालों के माध्यम से विपक्ष शासित राज्यों के प्रशासन में बाधा डाल रही है। विधेयकों को रोककर, सरकारी आदेशों को दबाकर, विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों में हस्तक्षेप कर और संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर। उन्होंने चेताया कि राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट में भेजा गया यह नया संदर्भ संविधान की मूल संरचना, संघीय ढांचे और निर्वाचित राज्य सरकारों की स्वायत्तता पर हमला है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्रियों से एक समन्वित कानूनी रणनीति के तहत इस संदर्भ का विरोध करने और सुप्रीम कोर्ट में एकजुट रुख अपनाने की अपील की है। स्टालिन ने अपने पत्र में लिखा कि यह जरूरी है कि राज्य सरकारें मिलकर इस प्रयास को विफल करें, जो कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित सरकारों की संवैधानिक भूमिका को कमज़ोर करने के लिए किया गया एक ‘कपटी’ प्रयास है।



