
मुंबई। मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष की मदद से वाशिम ज़िले के मंगरुलपीर तालुका निवासी सात वर्षीय देवांशी रविंद्र गावंडे का हाल ही में सफल लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। बच्ची के माता-पिता ने कहा कि यह महंगी सर्जरी मुख्यमंत्री राहत कोष और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में संचालित चैरिटी हॉस्पिटल हेल्प डेस्क की पहल से संभव हो पाई।जनवरी 2025 में देवांशी को पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई थी। पहले अकोला और फिर नागपुर में हुई जाँच में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पाया कि उसका लिवर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका है और तुरंत ट्रांसप्लांट की आवश्यकता है। ऑपरेशन की अनुमानित लागत लगभग 15 लाख रुपये थी। देवांशी के पिता रवींद्र गावंडे सब्ज़ी बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, इसलिए इतनी बड़ी राशि जुटाना उनके लिए असंभव था। इस बीच उन्हें मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने इस कोष से मदद की गुहार लगाई और साथ ही सोशल मीडिया पर भी अपील की। मुख्यमंत्री सहायता कोष की पहल पर देवांशी का इलाज मुंबई के वाडिया अस्पताल में शुरू हुआ। इस उपचार के लिए मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष, टाटा ट्रस्ट, सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने आर्थिक मदद की। देवांशी की माँ मीनाक्षी गावंडे ने अपना लिवर दान किया और 7 जुलाई 2025 को बच्ची का सफल ट्रांसप्लांट हुआ। फिलहाल देवांशी की हालत स्थिर है और उसकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है। हाल ही में परिवार ने उसका जन्मदिन भी खुशी-खुशी मनाया। देवांशी के माता-पिता ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष और टाटा ट्रस्ट की मदद से ही उनकी बेटी को नई ज़िंदगी मिली। मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता प्रकोष्ठ के अधिकारियों ने कहा कि हमारा प्रयास है कि हर ज़रूरतमंद और गरीब मरीज़ तक समय पर इलाज पहुँचे। देवांशी इसका जीवंत उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में यह प्रकोष्ठ राज्यभर के ग़रीब व ज़रूरतमंद मरीज़ों की मदद के लिए सक्रिय है और आम नागरिकों को बड़े पैमाने पर इसका लाभ मिल रहा है।




