
काठमांडू। नेपाल में जारी उग्र प्रदर्शनों और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली व राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बीच, देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकीं सुशीला कार्की को नेपाल का अंतरिम नेता नियुक्त किया गया है। उनसे उम्मीद है कि वे नए चुनाव होने तक मौजूदा संकट में देश का नेतृत्व करेंगी। जानकारी के अनुसार, यह फैसला जेन-जी मूवमेंट से जुड़े युवाओं की एक चार घंटे लंबी वर्चुअल बैठक में लिया गया। आंदोलनकारियों ने साफ़ किया कि वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति को नेतृत्व नहीं सौंपेंगे। इसी वजह से, गैर-राजनीतिक और न्यायपालिका से जुड़ी रही सुशीला कार्की के नाम पर सर्वसम्मति बनी। अब वे सेना से बातचीत कर अंतरिम सरकार गठन की दिशा में युवाओं का प्रतिनिधित्व करेंगी।
कौन हैं सुशीला कार्की?
7 जून 1952 को विराटनगर में जन्मी सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रही हैं। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), भारत से पॉलिटिकल साइंस और कानून की पढ़ाई की। सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ट्रांजिशनल जस्टिस और चुनावी विवादों से जुड़े ऐतिहासिक मामलों की अध्यक्षता की और न्यायपालिका की स्वतंत्र भूमिका को मजबूत किया।
कार्की को भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ के रुख के लिए जाना जाता है। 2017 में उनके ज्यूडिशियल एक्टिविज़्म के चलते उन पर महाभियोग प्रस्ताव भी लाया गया था।
नेपाल में बीते दिनों हुए हिंसक प्रदर्शनों ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। सोमवार को सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय पर धावा बोल दिया, संसद और सुप्रीम कोर्ट भवन में आग लगा दी और कई नेताओं के घरों में तोड़फोड़ की। झड़पों में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं।



