Thursday, January 15, 2026
Google search engine
HomeUncategorizedदंगा मामले में घर गिराने पर नागपुर नगर निगम की हाईकोर्ट में...

दंगा मामले में घर गिराने पर नागपुर नगर निगम की हाईकोर्ट में बिना शर्त माफी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं होने का दावा

नागपुर। दंगा मामले में आरोपियों के घरों को ध्वस्त करने को लेकर घिरे विवाद में, नागपुर नगर निगम (NMC) के आयुक्त अभिजीत चौधरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में बिना शर्त माफी मांगी है। उन्होंने एक हलफनामे में स्वीकार किया कि नगर निगम के अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की जानकारी नहीं थी, जिसमें किसी दंगा आरोपी की संपत्ति गिराने से पहले प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों का पालन आवश्यक बताया गया है। हाईकोर्ट की पीठ में जस्टिस नितिन साम्ब्रे और वृषाली जोशी ने महाराष्ट्र सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। 17 मार्च को नागपुर में उस समय हिंसा भड़क उठी थी, जब विहिप द्वारा औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग के बीच ‘चादर’ जलाने की अफवाह फैल गई। इसके बाद दंगों में शामिल बताए गए फहीम खान और यूसुफ शेख समेत अन्य आरोपियों की संपत्तियों पर कार्रवाई की गई।
हालांकि, 24 मार्च को हाईकोर्ट ने आरोपियों के घर गिराने पर रोक लगाते हुए प्रशासन पर “अत्याचार” का आरोप लगाया। लेकिन इससे पहले ही फहीम खान का दो मंजिला घर ढहा दिया गया था, जबकि यूसुफ शेख के घर के अवैध हिस्से को गिराने की कार्रवाई कोर्ट के आदेश के बाद रोक दी गई। अपने हलफनामे में चौधरी ने कहा “मैं न्यायालय से बिना शर्त माफी मांगता हूं क्योंकि यह स्पष्ट हुआ है कि अधिकारियों ने अनजाने में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन किया है। न तो मुझे, न नगर नियोजन विभाग को, और न ही क्षेत्रीय अधिकारियों को इस फैसले या उसके अनुरूप किसी भी सरकारी परिपत्र की जानकारी थी। चौधरी ने यह भी जोड़ा कि महाराष्ट्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में कोई परिपत्र NMC को अब तक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई जानबूझकर नहीं की गई, न ही याचिकाकर्ताओं या उनकी संपत्ति के खिलाफ कोई दुर्भावना थी। यह कार्रवाई स्लम अधिनियम, 1971 और मौजूदा स्थिति के तहत की गई थी।हलफनामे में साफ किया गया है कि यदि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी होती, तो नगर निगम अलग ढंग से कार्रवाई करता। अब जबकि मामला अदालत में है, नागपुर नगर निगम ने अदालत से दया और मार्गदर्शन की गुहार लगाई है। हाईकोर्ट द्वारा अब महाराष्ट्र सरकार से भी यह स्पष्ट करने की उम्मीद है कि आखिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का परिपत्र जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों तक क्यों नहीं पहुंचाया गया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments