
मुंबई (इंद्र यादव)। मायानगरी में कानून की रक्षा करने वाली खाकी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अंधेरी पूर्व के व्यस्त इलाके में दिनदहाड़े हुई 25 लाख रुपये की लूट का खुलासा जब हुआ, तो खुद पुलिस महकमा भी चौंक गया। इस वारदात का मास्टरमाइंड कोई बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि मुंबई पुलिस का ही एक सेवारत कांस्टेबल निकला। हालांकि, पुलिस ने तेजी दिखाते हुए 24 घंटे के भीतर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और पूरी रकम बरामद कर ली।यह घटना 3 अप्रैल 2026 की दोपहर करीब 1:40 बजे की है। तेली गली क्रॉस रोड पर नालासोपारा निवासी 51 वर्षीय शैलेश मोरे, जो एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के सहायक हैं, 25 लाख रुपये नकद लेकर जा रहे थे। तभी एक आरोपी ने उन्हें धमकाकर पैसों से भरा बैग छीन लिया और भीड़ का फायदा उठाकर फरार हो गया।जांच के दौरान पुलिस को शक हुआ कि यह कोई सामान्य लूट नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश है। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी निगरानी के आधार पर जांच आगे बढ़ी, तो शक की सुई अंबोली पुलिस स्टेशन में तैनात कांस्टेबल ईश्वर बालकृष्ण जाधव पर जाकर टिकी।गिरफ्तार आरोपियों में ईश्वर जाधव (31), अभिषेक प्रमोद माली (33), सागर महादेव सुतार (36) और पुरुषोत्तम रामचल कनोजिया (39) शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, जाधव ने अपनी वर्दी और सूचना तंत्र का गलत इस्तेमाल करते हुए इस पूरी साजिश को अंजाम दिया।मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया और 4 अप्रैल की आधी रात को शहर के अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि लूटे गए पूरे 25 लाख रुपये भी बरामद कर लिए गए।हैरानी की बात यह है कि चारों आरोपियों का पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस वारदात को ‘वन-टाइम जैकपॉट’ के रूप में अंजाम दिया गया था।इस घटना ने एक बार फिर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और आंतरिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में जुहू में भी दो पुलिसकर्मियों के अपराध में शामिल होने का मामला सामने आया था, जिससे महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।सभी आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 309(4) के तहत गिरफ्तार किया गया है और अदालत ने उन्हें 7 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने पहले भी ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है।यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि अपराधी चाहे वर्दी में ही क्यों न हो, कानून की पकड़ से बच पाना मुश्किल है।




