
मुंबई। पश्चिम रेलवे के मुंबई मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) द्वारा लगाए गए ₹1,59,22,550 के पर्यावरण मुआवजे के खिलाफ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में अपील दाखिल की है। 9 दिसंबर, 2024 को एमपीसीबी द्वारा जारी किए गए इस आदेश को चुनौती देते हुए डीआरएम ने तर्क दिया कि इस भारी-भरकम जुर्माने का कोई स्पष्ट औचित्य नहीं दिया गया था। इसके चलते उन्होंने एनजीटी से हस्तक्षेप की मांग की है।
एमपीसीबी की जांच और कार्रवाई
इसके बाद, एमपीसीबी ने इस मामले पर जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। 10 जून को किए गए निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि माहिम जंक्शन पर मुख्य ट्रैक और प्लेटफार्मों की सफाई की जा रही थी, लेकिन रेलवे साइडिंग ट्रैक पर भारी मात्रा में कचरा जमा था। इस कचरे का प्रमुख स्रोत आसपास की झुग्गी बस्तियों से फेंका गया कचरा था। 21 जून को, एमपीसीबी ने माहिम जंक्शन के पश्चिमी रेलवे अधिकारियों को निर्देश जारी किए, जिसमें झुग्गी-झोपड़ियों से रेलवे साइडिंग यार्ड में ठोस कचरे के अनुचित निपटान की समस्या को तत्काल हल करने के लिए कहा गया। एमपीसीबी के हलफनामे में यह भी कहा गया कि रेलवे अधिकारियों ने स्वयं इस समस्या को स्वीकार किया है और बताया कि सफाई कार्य जारी है, जिसमें जेसीबी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। इसके बावजूद, एमपीसीबी ने डीआरएम पर 1.59 करोड़ रूपए का जुर्माना लगा दिया।
डीआरएम की अपील और अगली सुनवाई
डीआरएम ने इस आदेश को चुनौती देते हुए एनजीटी से गुहार लगाई है कि यह अत्यधिक कठोर और अनुचित है। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे पहले से ही सफाई के प्रयासों में लगा हुआ था, इसलिए इस तरह का दंड अव्यावहारिक है। एनजीटी ने इस पर विचार करते हुए डीआरएम को संशोधित अपील प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और एक सप्ताह की समय सीमा दी। मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी, 2025 को होगी।




