
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्कूली शिक्षा में किए गए बदलाव के तहत कक्षा एक से तीसरी भाषा को अनिवार्य करने और छात्रों को भाषा चुनने का अधिकार दिए जाने पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने तीव्र आपत्ति जताई है। पार्टी ने इसे “हिंदी की अनिवार्यता थोपने की कोशिश” करार दिया है और कई जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। मनसे मुंबई अध्यक्ष संदीप देशपांडे ने सरकार के फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि “तीसरी भाषा को अनिवार्य करना आवश्यक नहीं है। न उत्तर प्रदेश, न गुजरात, न कर्नाटक में यह फॉर्मूला लागू है, तो फिर केवल महाराष्ट्र में ही क्यों? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार मराठी को दबाकर हिंदी को जबरन थोपने की कोशिश कर रही है। देशपांडे ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो हम सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे और सरकार के लिए मराठी लोगों को रोकना मुश्किल हो जाएगा। संदर्भ में संदीप देशपांडे ने शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत पर भी परोक्ष हमला करते हुए कहा कि “केवल बयान देने से कुछ नहीं होगा, मराठी जनता को सड़कों पर उतरना होगा। वहीं समाजवादी पार्टी विधायक अबू आजमी के एक कथित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए देशपांडे ने तीखी भाषा में कहा, “अगर अबू आजमी भूल गए हैं कि हमारे विधायकों ने उन्हें क्या दिया था, तो हमें एक बार फिर उन्हें उनके मुंह पर तमाचा मारना होगा। उन्होंने सभी मराठी नागरिकों से अपील की कि वे इस फैसले के विरोध में आगे आएं। साथ ही राज्य सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि “आपको यह नहीं भूलना चाहिए कि मराठी लोगों ने आपको चुना है। वही जनता आपको सत्ता से हटा भी सकती है। मनसे का आरोप है कि यह नीति मराठी भाषा और संस्कृति के खिलाफ है, और यदि सरकार ने समय रहते इसे वापस नहीं लिया, तो प्रदेश भर में तीव्र आंदोलन शुरू होगा।




