
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को निर्देश दिया कि वे दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के.सक्सेना द्वारा दायर लगभग दो दशक पुराने मानहानि मामले में अपनी सजा को लेकर वर्चुअल पेशी की अनुमति प्राप्त करने हेतु सत्र न्यायालय में औपचारिक आवेदन करें। यह मामला 24 नवंबर 2000 की एक प्रेस विज्ञप्ति से जुड़ा है, जिसमें पाटकर ने सक्सेना को “कायर” बताते हुए उन पर गुजरात के संसाधनों से संबंधित संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और अनैतिक व्यवहार में शामिल होने का आरोप लगाया था। हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति शालिन्दर कौर ने पाटकर की याचिका को समय से पहले करार देते हुए कहा कि उनके वकील सत्र न्यायालय में उचित आवेदन दाखिल कर सकते हैं, जिस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा। साथ ही, हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील की अगली सुनवाई की तारीख 19 मई निर्धारित की है। यह मामला पिछले वर्ष तब चर्चा में आया जब मजिस्ट्रेट अदालत ने पाटकर को IPC की धारा 500 के तहत दोषी ठहराते हुए पांच महीने के साधारण कारावास और ₹10 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। हाल ही में, 2 अप्रैल को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने उनकी प्रारंभिक अपील खारिज कर दी और उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति को अनिवार्य बताया, जिसके खिलाफ पाटकर ने हाईकोर्ट का रुख किया। पाटकर की कानूनी टीम ने तर्क दिया कि उम्र और लंबी कानूनी प्रक्रिया को देखते हुए उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति दी जानी चाहिए, और सत्र न्यायालय का इस पर जोर देना उसकी सीमा का अतिक्रमण है। अब मामला सत्र न्यायालय के समक्ष आवेदन के बाद आगे बढ़ेगा, जिससे यह स्पष्ट होगा कि पाटकर को आभासी उपस्थिति की अनुमति मिलेगी या उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।




