
मुंबई। महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की विशेष अदालत ने गैंगस्टर रवि पुजारी को 1999 में दाऊद इब्राहिम के कथित सहयोगी अनिल शर्मा की हत्या के मामले में सबूतों के अभाव में मंगलवार को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ठोस और निर्णायक सबूत प्रस्तुत करने में विफल रहा, जिसके चलते यह फैसला सुनाया गया। यह मामला 1992 में मुंबई के जेजे अस्पताल में हुई चर्चित गोलीबारी से जुड़ा हुआ था, जहां अरुण गवली गिरोह ने दाऊद के बहनोई पर हमला किया था। अभियोजन के अनुसार, उसी गोलीबारी की प्रतिक्रिया स्वरूप दाऊद गुट के सदस्य अनिल शर्मा की हत्या 2 सितंबर 1999 को की गई थी। शर्मा की जीप को मुंबई की तेली गली क्रॉस लेन पर एक मारुति कार और ऑटोरिक्शा ने घेर लिया था, जिसके बाद कार और ऑटो में सवार हमलावरों ने उस पर अंधाधुंध फायरिंग की। घायल अवस्था में शर्मा को कूपर अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि छोटा राजन ने रवि पुजारी को यह हत्या अंजाम देने की जिम्मेदारी दी थी। इस सिलसिले में शर्मा के पिता निर्भयनारायण ने भी गवाही दी थी कि उनके बेटे को छोटा राजन, रवि पुजारी और गुरु साटम से जान का खतरा था और उन्होंने घर के आसपास संदिग्ध गतिविधियां भी देखी थीं।पुजारी के वकील डीएस मानेरकर ने बताया कि यह मामला उसके भारत प्रत्यर्पण के बाद समाप्त होने वाला पहला मामला है। उल्लेखनीय है कि रवि पुजारी को पिछले साल अफ्रीका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था। इस मामले में अदालत पहले ही 11 अन्य आरोपियों को बरी कर चुकी है, जिसमें छोटा राजन भी शामिल है जिसे मुख्य साजिशकर्ता बताया गया था। अदालत के इस फैसले के साथ ही एक लंबे समय से लंबित आपराधिक प्रकरण का न्यायिक समापन हो गया है।




