
मुंबई। मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे की पांच दिवसीय भूख हड़ताल के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने पात्र मराठा व्यक्तियों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की घोषणा की है। यह प्रक्रिया सेवा पंढरवाड़ा पहल के तहत 17 सितंबर से शुरू होगी और 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) तक चलेगी। इस तारीख का चयन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और मराठवाड़ा मुक्ति दिवस के साथ मेल खाता है। पुणे के संभागीय आयुक्त ने पांच जिलों के कलेक्टरों को प्रमाणपत्र जारी करने की तैयारी करने का निर्देश दिया है। यह कदम हाल ही में जारी सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के अनुरूप है, जिसमें 1918 के हैदराबाद राजपत्र को मान्यता दी गई है। इसके तहत अनुमान है कि हजारों मराठा व्यक्तियों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में आरक्षण लाभ दिलाने के लिए कुनबी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। छत्रपति संभाजीनगर संभागीय आयुक्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार कर रहे हैं, और न्यायमूर्ति शिंदे समिति जल्द ही इस पर चर्चा करने वाली है। सरकार पहले ही मराठवाड़ा में लगभग 2.5 लाख कुनबी प्रमाणपत्र वितरित कर चुकी है। जरांगे ने चेतावनी दी है कि यदि तय समयसीमा तक प्रमाणपत्र नहीं दिए गए, तो आंदोलन फिर से शुरू हो सकता है। उन्होंने समुदाय से धैर्य और सतर्कता बरतने का आग्रह किया, लेकिन साथ ही जीआर के वादों को समय पर पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया। हालांकि, मराठा समुदाय के कुछ हिस्सों में इस जीआर के वास्तविक लाभों को लेकर संदेह भी बना हुआ है। इसके बावजूद, यह कदम मराठों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है।




