
मुंबई। प्रयागराज महाकुंभ के दौरान किन्नर अखाड़े ने बड़ा फैसला लेते हुए हाल ही में महामंडलेश्वर बनीं ममता कुलकर्णी को इस पद से हटा दिया है। इसके साथ ही लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को आचार्य महामंडलेश्वर पद और अखाड़े से बाहर कर दिया गया है। किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने अखाड़े का पुनर्गठन करने की घोषणा की और जल्द ही नए आचार्य महामंडलेश्वर की नियुक्ति की बात कही।
क्यों लिया गया ये फैसला?
अजय दास ने लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी पर अखाड़े के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। वहीं, ममता कुलकर्णी की महामंडलेश्वर पद पर नियुक्ति को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। कुलकर्णी ने हाल ही में प्रयागराज में संन्यास लिया था और संगम घाट पर पिंडदान किया था, जिसके तुरंत बाद उन्हें महामंडलेश्वर बना दिया गया। इस निर्णय पर कई धार्मिक हस्तियों, खासकर बाबा रामदेव और ट्रांसजेंडर कथावाचक हिमांगी सखी मां ने आपत्ति जताई थी।
ममता कुलकर्णी से महामंडलेश्वर पद क्यों छीना गया?
संन्यासी बनने से पहले ही उन्हें महामंडलेश्वर पद दिए जाने से विवाद हुआ।
उनके फिल्मी करियर में किए गए बोल्ड दृश्यों पर आपत्ति जताई गई।
ममता कुलकर्णी का नाम अंडरवर्ल्ड और ड्रग्स मामले से जुड़ा रहा है।
बिना मुंडन संस्कार के महामंडलेश्वर पद ग्रहण करने पर सवाल उठे।
किन्नर अखाड़े के नियमों के अनुसार वैजंती माला नहीं पहनने पर आपत्ति हुई।
अब क्या होगा?
अखाड़े के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, और जल्द ही नए महामंडलेश्वर की नियुक्ति की जाएगी। वहीं, इस विवाद के चलते ममता कुलकर्णी और लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की धार्मिक पहचान और भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।




