Monday, March 30, 2026
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महाराष्ट्र में दिव्यांगों के लिए बड़ा फैसला: अब सभी 21 श्रेणियों को मिलेगा योजनाओं का लाभ

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए दिव्यांग व्यक्ती हक्क अधिनियम 2016 के तहत निर्धारित सभी 21 श्रेणियों के दिव्यांग नागरिकों को सरकारी योजनाओं, अनुदान और सुविधाओं का लाभ देने का फैसला किया है। दिव्यांग सक्षमीकरण विभाग के सचिव तुकाराम मुंढे ने जानकारी देते हुए बताया कि यह निर्णय राज्य के अधिकाधिक दिव्यांग नागरिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और उनके समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
7 से बढ़ाकर 21 श्रेणियों तक विस्तार
अब तक वर्ष 1995 के कानून के तहत केवल 7 श्रेणियों के दिव्यांगों को ही लाभ मिल रहा था, लेकिन नए निर्णय के बाद यह दायरा बढ़ाकर 21 श्रेणियों तक कर दिया गया है। इससे पहले कई सरकारी कार्यालय पुराने नियमों के आधार पर ही लाभ दे रहे थे, जिसके कारण नए वर्गों में शामिल दिव्यांगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
इन सभी दिव्यांग श्रेणियों को मिलेगा लाभ
नए निर्णय के तहत अस्थि दिव्यांग, कुष्ठरोगमुक्त, सेरेब्रल पाल्सी, बौनापन, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, एसिड अटैक पीड़ित, पूर्ण व आंशिक दृष्टिहीन, श्रवण बाधित, वाणी दोष, बौद्धिक दिव्यांगता, लर्निंग डिसएबिलिटी, ऑटिज्म, मानसिक बीमारी, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, पार्किंसन, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया, सिकल सेल, न्यूरोलॉजिकल विकार और बहुविकलांग जैसे सभी वर्ग शामिल किए गए हैं।
UDID कार्ड अनिवार्य
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए संबंधित व्यक्ति के पास कम से कम 40% या उससे अधिक दिव्यांगता का प्रमाणित यूडीआईडी कार्ड होना आवश्यक होगा। केवल स्थायी दिव्यांगता प्रमाणपत्र धारकों को ही इन योजनाओं का लाभ मिलेगा।
इन योजनाओं का मिलेगा फायदा
इस फैसले के बाद दिव्यांग व्यक्तियों को आवास योजनाएं, छात्रवृत्ति, दिव्यांग विवाह योजना, गुणवत्ता पुरस्कार, स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता, उपकरणों के लिए अनुदान, राज्य पुरस्कार योजना और बीज पूंजी जैसी कई योजनाओं का लाभ मिलेगा।
सभी विभागों पर लागू होगा निर्णय
यह निर्णय राज्य के सभी मंत्रालयीन विभागों, स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं, निगमों और अनुदानित संस्थाओं पर लागू होगा। साथ ही, संबंधित विभागों को आवश्यकतानुसार नई योजनाएं तैयार कर अलग से शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। यह फैसला दिव्यांग व्यक्तियों को मुख्यधारा में लाने और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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