
मुंबई। महावितरण ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की है, जिसमें महाराष्ट्र के उपभोक्ताओं के लिए बिजली टैरिफ में तत्काल 12 प्रतिशत की कमी लागू करने का निर्देश दिया गया था। यह विवाद महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग के 28 मार्च के उस आदेश से शुरू हुआ था, जिसमें महावितरण के दावों के उलट कंपनी के पास राजस्व अधिशेष मानकर दरों में बड़ी कटौती की गई थी। महावितरण ने इस कटौती को वित्तीय रूप से नुकसानदायक बताते हुए पाँच वर्षों में लगभग 92 हजार करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान पेश किया और तुरंत समीक्षा याचिका दायर की, जिसके बाद आयोग ने 25 जून को संशोधित आदेश जारी कर कंपनी के तर्कों को काफी हद तक स्वीकार करते हुए कुछ उपभोक्ता वर्गों के लिए दरें बढ़ा दीं। हालांकि यह संशोधन उच्च न्यायालय में चुनौती दिया गया, जहाँ याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आयोग ने हितधारकों को पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए बिना निर्णय लेकर प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन किया है।
उच्च न्यायालय ने 25 जून का आदेश रद्द करते हुए 28 मार्च की टैरिफ कटौती को बहाल कर दिया और आयोग को सभी पक्षों को सुनकर मामले की पुन: समीक्षा करने का निर्देश दिया। इस फैसले से उत्पन्न वित्तीय दबाव के चलते महावितरण अब सर्वोच्च न्यायालय से उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने और मौजूदा ऊंची दरों को तब तक लागू रखने की अनुमति चाहता है जब तक कि पूरा मामला अंतिम निर्णय तक न पहुँच जाए।




