Thursday, February 5, 2026
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कर्तव्यपथ पर महाराष्ट्र के चित्ररथ को प्रथम पुरस्कार, ‘गणेशोत्सव: आत्मनिर्भरता का प्रतीक’ बना राष्ट्रीय आकर्षण

मुंबई। भारतीय गणतंत्र दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के कर्तव्यपथ पर आयोजित भव्य परेड में महाराष्ट्र राज्य के चित्ररथ ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर सर्वोच्च सम्मान हासिल किया। आज दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रंगशाला, केंट में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और सहसचिव अमिताभ श्रीवास्तव के हाथों पुरस्कार वितरण किया गया। ‘गणेशोत्सव: आत्मनिर्भरता का प्रतीक’ विषय पर आधारित इस चित्ररथ ने महाराष्ट्र की सांस्कृतिक समृद्धि और आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्रभावशाली ढंग से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। चित्ररथ के माध्यम से महाराष्ट्र की अष्टविनायक परंपरा, गणेशोत्सव में जनभागीदारी तथा इस उत्सव से जुड़े लाखों लोगों के रोजगार जैसे मूर्तिकार, सजावट, वाद्य निर्माण और अन्य कारीगरों की भूमिका को सशक्त रूप से दर्शाया गया।
चित्ररथ के साथ पारंपरिक वेशभूषा में लेझीम और नृत्य प्रस्तुत करने वाले कलाकारों ने कर्तव्यपथ पर विशेष ऊर्जा और उत्साह का संचार किया, जिससे महाराष्ट्र के चित्ररथ को निर्णायकों की विशेष सराहना प्राप्त हुई। इसके साथ ही महाराष्ट्र के सांस्कृतिक दल को भी तीसरा पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्य मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार ने कहा कि यह सम्मान महाराष्ट्र की मिट्टी में रची-बसी कला और कारीगरों की मेहनत का सम्मान है। उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन का एक सशक्त माध्यम है, जिसे महाराष्ट्र ने पूरे देश और विश्व के सामने प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया है। यह उपलब्धि महाराष्ट्र के सांस्कृतिक वैभव और कलात्मक अनुशासन की राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त पहचान है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के पीछे सांस्कृतिक कार्य मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार, सांस्कृतिक कार्य विभाग के सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी के मार्गदर्शन तथा सांस्कृतिक कार्य संचालनालय के संचालक बिभीषण चवरे के दूरदर्शी नेतृत्व का महत्वपूर्ण योगदान रहा। चित्ररथ दल के अधिकारियों, कलाकारों और सभी सहयोगियों की मेहनत, समर्पण और टीम भावना के कारण यह सफलता संभव हो सकी। कर्तव्यपथ पर इस ऐतिहासिक सफलता से महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान और अधिक सशक्त हुई है। इस चित्ररथ के गीत बिभीषण चवरे द्वारा लिखे गए, जबकि गीतकार मयुरेश सुकाळे और सिद्धेश जाधव हैं। संगीत संयोजन मनोहर गोलांबरे द्वारा किया गया। कोल्हापुर, सातारा और सांगली ग्रामीण क्षेत्रों से आए कलाकारों तथा चंद्रकांत पाटिल और राजेंद्र संकपाळ के दल ने सामूहिक भावना के साथ लेझीम नृत्य का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। चित्ररथ का कला निर्देशन और निर्माण नागपुर के तुषार प्रधान, रोशन इंगोले, कृष्णा सालटकर और श्रीपाद धोंगडे द्वारा किया गया।

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