
चंद्रपुर। पूर्वी महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में मंगलवार को बाघों के हमलों की दो और घटनाएं सामने आईं, जिनमें एक महिला और एक पुरुष की दर्दनाक मौत हो गई। इन दो नई घटनाओं के साथ मई महीने में अब तक कुल 11 लोगों की जान बाघों के हमलों में जा चुकी है। ये घटनाएं ताडोबा अंधारी टाइगर रिजर्व (TATR) और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगातार चिंता का विषय बनती जा रही हैं। महाराष्ट्र वन विकास निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पहली घटना सुबह के समय चिचपल्ली वन रेंज के अंतर्गत चिरोली गांव की रहने वाली नंदा संजय माकलवार (45) के साथ हुई। नंदा अपने पति और कुछ अन्य ग्रामीणों के साथ बांस की लकड़ियाँ इकट्ठा करने जंगल गई थीं, जब बाघ ने उस पर हमला कर दिया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। दूसरी घटना दोपहर करीब हुई, जब कांतापेठ गांव के निवासी सुरेश सोपानकर (52) जंगल में मवेशी चराने गए थे। वह भी चिचपल्ली रेंज के उसी कम्पार्टमेंट नंबर 524 में बाघ का शिकार बने। इससे पहले 10 मई को, चंद्रपुर जिले की सिंदेवाही तहसील में तेंदू पत्ते एकत्र करते समय तीन महिलाओं को भी बाघ ने मार डाला था।
ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग पर सवाल
लगातार हो रहे बाघ हमलों के कारण स्थानीय ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की ओर से पर्याप्त सुरक्षा उपाय, सावधानी अभियान और पूर्व चेतावनी तंत्र का अभाव है, जिससे ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं। वन अधिकारियों ने बताया कि सभी मामलों में ताडोबा के बफर जोन में लोग संसाधन (लकड़ी, पत्ते आदि) एकत्र करने जाते हैं, जिससे बाघों से आमना-सामना होने की संभावना अधिक रहती है। विभाग ने लोगों से बार-बार आग्रह किया है कि वे जंगल में अकेले या समूह से अलग होकर प्रवेश न करें, लेकिन आर्थिक निर्भरता और ग्रामीणों की जरूरतें उन्हें बार-बार जंगल की ओर खींच ले जाती हैं। वन विभाग ने कहा है कि वह इन हमलों की विस्तृत जांच कर रहा है और संबंधित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई गई है। साथ ही, प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।




