
दावोस। महाराष्ट्र ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए एशिया का सबसे बड़ा विकेन्द्रित सौर ऊर्जा कार्यक्रम सफलतापूर्वक लागू किया है। वर्ष के अंत तक राज्य सौर ऊर्जा के माध्यम से 16 गीगावॉट बिजली उत्पादन करेगा। यह जानकारी बुधवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विश्व आर्थिक मंच (डबल्यूईएफ़) की वार्षिक बैठक के दौरान दावोस में दी। इंडिया पैवेलियन में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन द्वारा आयोजित “स्केलिंग सोलर एनर्जी व्हेयर इट मैटर्स” विषयक सत्र में मुख्यमंत्री फडणवीस ने महाराष्ट्र के सौर ऊर्जा मॉडल को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। इस अवसर पर केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि बीते एक दशक में महाराष्ट्र ने अपने ऊर्जा क्षेत्र का व्यापक कायाकल्प किया है। राज्य में केवल 10 प्रतिशत कृषि उपभोक्ता कुल बिजली उपभोक्ताओं में शामिल थे, लेकिन वे पहले लगभग 30 प्रतिशत बिजली की खपत करते थे। कृषि क्षेत्र को बिजली आपूर्ति की वास्तविक लागत लगभग 8 रुपये प्रति यूनिट थी, जबकि किसानों से केवल 1 रुपये प्रति यूनिट वसूला जाता था, जिससे सरकार और अन्य उपभोक्ताओं पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महाराष्ट्र सरकार ने कृषि क्षेत्र की बिजली आपूर्ति को सौर ऊर्जा पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया और एशिया की सबसे बड़ी विकेन्द्रित सौर योजना शुरू की। इसके तहत प्रत्येक कृषि फीडर को स्वतंत्र सौर ऊर्जा प्रणाली से जोड़ा गया और किसानों के लिए अलग बिजली वितरण कंपनी की स्थापना की गई। मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि इस योजना के तहत हर महीने लगभग 500 मेगावॉट सौर क्षमता जोड़ी जा रही है, जिसे जल्द ही बढ़ाकर 1 गीगावॉट प्रति माह किया जाएगा। इससे किसानों को बिजली आपूर्ति की लागत घटकर 3 रुपये प्रति यूनिट से भी कम हो गई है, जिससे औद्योगिक और घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला बोझ भी कम हुआ है। उन्होंने बताया कि पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत महाराष्ट्र में लगभग 4 गीगावॉट रूफटॉप सोलर क्षमता विकसित की जा रही है। इसके साथ ही “मागेल त्याला सौर पंप” योजना के माध्यम से राज्य में देश के कुल सौर पंपों का करीब 60 प्रतिशत स्थापित किया जा चुका है, जो शीघ्र ही 10 लाख का आंकड़ा पार करेगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस सौर ऊर्जा कार्यक्रम से होने वाली कार्बन उत्सर्जन में कमी लगभग 300 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। वर्ष 2032 तक महाराष्ट्र 45 गीगावॉट अतिरिक्त बिजली उत्पादन करेगा, जिसमें से 70 प्रतिशत सौर ऊर्जा से प्राप्त होगी। नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा, जो कुछ वर्ष पहले 13 प्रतिशत था, 2030 तक बढ़कर 52 प्रतिशत तक पहुँचने की उम्मीद है। ग्रिड स्थिरता के लिए राज्य बैटरी स्टोरेज और पंप स्टोरेज परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। पश्चिमी घाट की भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ उठाते हुए 80,000 मेगावॉट क्षमता की पंप स्टोरेज परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं, जिन्हें भविष्य में 1 लाख मेगावॉट तक विस्तारित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र का सौर ऊर्जा मॉडल न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश और दुनिया के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन रहा है।




