
मुंबई। महाराष्ट्र ने देश में गोद लेने की प्रक्रिया में पहला स्थान प्राप्त किया है। वर्ष 2024-25 में, राज्य में कुल 537 बच्चों को कानूनी रूप से इच्छुक दत्तक माता-पिता को सौंपा गया, जिससे इन बच्चों को उनका हकदार ‘माता-पिता’ और ‘घर’ मिला। महिला एवं बाल विकास मंत्री कु. अदिति तटकरे ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त किया और सभी संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों, संस्थानों व दत्तक स्रोत एजेंसियों को बधाई दी। देश में कुल 4,512 कानूनी रूप से गोद लेने योग्य बच्चों में से महाराष्ट्र में अकेले 537 बच्चों को कानूनी रूप से गोद लिया गया है। यह प्रक्रिया किशोर न्याय (बाल देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2015, संशोधित अधिनियम 2021 और CARA गोद लेने के नियम 2022 के तहत प्रभावी रूप से लागू की गई है। केंद्रीय दत्तक संसाधन प्राधिकरण (CARA), नई दिल्ली ने भी इस सराहनीय कार्य को मान्यता दी है। महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत 60 विशेष गोद लेने की मान्यता प्राप्त संस्थाएं सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। यह संस्थाएं दत्तक पात्र बच्चों को कानूनी रूप से मुक्त घोषित करके उन्हें उपयुक्त माता-पिता और परिवार प्रदान करने का कार्य कर रही हैं। इस प्रक्रिया को महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव डॉ. अनुप कुमार यादव और आयुक्त नयना गुंडे के मार्गदर्शन में और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। राज्य सरकार ने अधिक से अधिक बच्चों को सुरक्षित और प्रेमपूर्ण परिवार प्रदान करने के लिए गोद लेने की प्रक्रिया को और तेज करने की योजना बनाई है।




