
मुंबई। महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे के 20 साल बाद साथ आने से राज्य की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। इसी बीच शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में उनकी पार्टी सत्ता में आएगी। राउत के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) 67 नहीं बल्कि करीब 115 सीटों पर जीत दर्ज करेगी और मनसे के साथ गठबंधन मिलकर 117 से 120 सीटों का आंकड़ा पार करेगा। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं दोनों को इस जीत पर पूरा भरोसा है। गौरतलब है कि 15 जनवरी को होने वाले बीएमसी चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने गठबंधन की औपचारिक घोषणा कर दी है, जिससे सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ठाणे में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और उसका मकसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को राजनीतिक रूप से कमजोर करना है। राउत ने कहा कि मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई जैसे अहम नगर निगमों के लिए सभी पार्टियां जोरदार तैयारी में जुटी हैं, सीट बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और कई जगह नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। हालांकि मुंबई में भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर नजर बनी हुई है, लेकिन राउत का कहना है कि भाजपा अंदरखाने शिंदे को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने ठाणे के कपूरबावड़ी जंक्शन और तीन हाथ नाका इलाके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े-बड़े बैनरों का हवाला देते हुए कहा कि ‘कमल’ के निशान और ‘नमो भारत, नमो ठाणे’ जैसे नारों वाले ये बैनर ठाणे की बदलती राजनीतिक दिशा के संकेत दे रहे हैं। राउत ने यह भी कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के समीकरण अलग होते हैं, लेकिन नगर निगम चुनावों में मुकाबला सीधा होगा—एक तरफ भाजपा और दूसरी तरफ शिवसेना (यूबीटी)-मनसे गठबंधन। उत्तर भारतीयों के खिलाफ कथित गुस्से वाले टेक्स्ट वाले बैनरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने इसे भाजपा की चाल बताया और पार्टी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा में आपराधिक सोच वाले लोग शामिल हैं। संजय राउत के इन बयानों से साफ है कि नगर निगम चुनाव नजदीक आते ही महाराष्ट्र की राजनीति और अधिक तीखी और संघर्षपूर्ण होने वाली है।




