Tuesday, January 13, 2026
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स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए ‘महाराष्ट्र नवप्रवर्तन शहर’ की होगी स्थापना, 50 हजार करोड़ एफडीआई का लक्ष्य

मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य नवप्रवर्तन सोसायटी की आमसभा की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्राप्त सुधारात्मक सुझावों पर तुरंत अमल किया जाए और स्टार्टअप्स के मार्गदर्शन के लिए एक मजबूत तंत्र तैयार किया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि महाराष्ट्र नवप्रवर्तन शहर की स्थापना के लिए शीघ्र कार्रवाई करते हुए आधारशिला रखी जाए, ताकि महाराष्ट्र अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रख सके। सह्याद्री अतिथिगृह में बुधवार को आयोजित इस बैठक में कौशल मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा वर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रघुनाथ माशेलकर, मित्रा के सीईओ प्रवीणसिंह परदेशी, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र स्टार्टअप, उद्यमिता एवं नवाचार नीति 2025 समाज में व्यापक परिवर्तन लाएगी और उद्यमिता व स्टार्टअप्स को पुनर्जीवित करेगी। कौशल मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने घोषणा की कि नई नीति के तहत मुख्यमंत्री उद्यमिता एवं नवाचार कोष बनाया जाएगा। इसके तहत 30 लाख तकनीकी रूप से शिक्षित युवाओं को एआई परीक्षा में आमंत्रित किया जाएगा, जिनमें से पाँच लाख का चयन कर हैकाथॉन, प्रतियोगिताओं और परीक्षणों के जरिए 25 हजार उम्मीदवारों को तकनीकी व वित्तीय सहायता देकर सफल उद्यमी और स्टार्टअप तैयार किए जाएंगे। महिला सशक्तिकरण के लिए बांद्रा स्थित चमड़ा संस्थान में एक ‘महिला-केंद्रित इनक्यूबेटर’ और ‘मिशन इनोवेशन 2047’ नामक विश्वस्तरीय केंद्र स्थापित किया जाएगा। साथ ही 20 वैश्विक कंपनियों की साझेदारी से ‘ग्लोबल महाराष्ट्र इनोवेशन समिट’ का आयोजन कर 50,000 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रघुनाथ माशेलकर ने कहा कि महाराष्ट्र की स्टार्टअप नीति 2025 पहले ही सकारात्मक परिणाम देने लगी है, जिसमें बोइंग कंपनी के साथ समझौता इसका बड़ा उदाहरण है। प्रवीण परदेशी ने बताया कि राज्य की नीति ने वित्तपोषण और स्टार्टअप विकास को सरल बनाया है। वहीं डॉ. माधुरी कानिटकर ने बताया कि चिकित्सा क्षेत्र में भी एनसीआई इनक्यूबेटर सेंटर के माध्यम से नए प्रयोग हो रहे हैं। बैठक में विभिन्न विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के कुलपति, वैज्ञानिक और उद्योगजगत के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। अधिकारियों ने नीति की वर्तमान स्थिति और कार्य योजना पर समीक्षा प्रस्तुत की।

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