Saturday, April 11, 2026
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विकसित भारत के लिए लागत दक्षता जरूरी, कॉस्ट ऑडिट अहम रणनीतिक हथियार: राज्यपाल

मुंबई। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने एक कुशल, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के निर्माण में कॉस्ट ऑडिट की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए कहा कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश का लागत के स्तर पर प्रतिस्पर्धी होना बेहद आवश्यक है। वह शुक्रवार को मुंबई में इंस्टीट्यूट ऑफ़ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया (आईसीएमएआई) द्वारा आयोजित “विकसित भारत के लिए कॉस्ट ऑडिट” विषयक राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक वृद्धि और औद्योगिक विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि खर्च किया गया हर रुपया, उपयोग में लाया गया हर संसाधन और लिया गया हर निर्णय देश की प्रगति में सार्थक योगदान दे। उन्होंने कॉस्ट ऑडिट को “आर्थिक शासन का एक रणनीतिक हथियार” बताते हुए कहा कि यह विभिन्न क्षेत्रों में दक्षता बढ़ाने, अपव्यय को कम करने और संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक प्रतिस्पर्धी माहौल में भारत को निर्णायक बढ़त दिलाने के लिए नवाचार और गुणवत्ता के साथ-साथ लागत दक्षता भी अनिवार्य है। मुक्त व्यापार समझौतों के विस्तार और बढ़ते वैश्विक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में कॉस्ट ऑडिट को उन्होंने बेंचमार्किंग, सतत सुधार और विवेकपूर्ण निर्णय प्रक्रिया का प्रभावी उपकरण बताया। राज्यपाल ने पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने में कॉस्ट ऑडिट की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया, खासकर बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवाएं, दूरसंचार, शिक्षा तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे उभरते क्षेत्रों में, जहां लागत निर्धारण का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। महाराष्ट्र की 29 विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में अपनी भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में 30 लाख से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं, लेकिन उनमें से कई को आईसीएमएआई द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले पेशेवर अवसरों की पर्याप्त जानकारी नहीं है। उन्होंने संस्थान से आग्रह किया कि वह विशेषकर छोटे शहरों के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों तक पहुंच बढ़ाकर अपने पाठ्यक्रमों और परीक्षाओं के बारे में जागरूकता फैलाए, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इस क्षेत्र में करियर बना सकें। इस अवसर पर डॉ. रमाकांत पांडा, आईसीएमएआई के अध्यक्ष टी.सी.ए. श्रीनिवास प्रसाद, उपाध्यक्ष नीरज जोशी, पेशेवर विकास समिति के अध्यक्ष मनोज आनंद, पूर्व अध्यक्ष विकास देवधर सहित उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

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