
मुंबई। चीन में निमोनिया जैसे लक्षण वाले रहस्यमयी बुखार का कहर बढ़ता जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। इसे लेकर केंद्र सरकार भी अलर्ट हो गई है और राज्यों को सतर्क रहने की हिदायत दी हैं। जिसके चलते कुछ राज्यों ने दिशा-निर्देश जारी किए है। चीन में बच्चों में बढ़ती सांस की बीमारी के मद्देनजर महाराष्ट्र सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों और नगर निगमों के सभी अस्पतालों के लिए एडवाइजरी जारी की है। जिसमें अस्पतालों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि वे अपने कोविड-19 बुनियादी ढांचे और प्रणालियों को तैयार रखें। जिसमें बेड की संख्या, ऑक्सीजन प्लांट सिलेंडर, वेंटिलेटर की व्यवस्था आदि शामिल है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को गंभीर तीव्र श्वसन बीमारी जैसी सांस की समस्याओं से संबंधित मामलों को रजिस्टर्ड करने और ऐसे मरीजों के नमूने परीक्षण के लिए आरटीपीसीआर लैब में भेजने का भी निर्देश दिया है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि अस्पताल में इस प्रकार के मामलों के इलाज में उपयोग की जाने वाली दवाओं का पर्याप्त स्टॉक होना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग ने संक्रामक रोगों के मरीजों का इलाज करते समय पीपीई किट, मास्क और हैंड सैनिटाइजर का उपयोग करने की भी सलाह दी। महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. प्रताप सिंह सरनिकर ने कहा यह एडवाइजरी केंद्र द्वारा रविवार को जारी की गयी एडवाइजरी के बाद जारी की गयी है, जिसमें चीन में उभरे स्वास्थ्य संकट के मद्देनजर राज्यों से तैयारियों की समीक्षा करने को कहा गया। तदनुसार, जिलों और नगर निगमों को अस्पतालों में निगरानी कड़ी करने और एडवाइजरी का पालन करने के लिए कहा गया है।
चीन में बिगड़े हालात
मिली जानकारी के मुताबिक, नवंबर महीने में उत्तरी चीन में बच्चों में अज्ञात निमोनिया के मामले मिले। बीजिंग और उत्तरी चीन के अस्पताल में सांस की बीमारियों से पीड़ित हजारों बच्चें हर दिन आ रहे हैं। इसलिए भारत सरकार चीन की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है। साथ ही कहा है कि अभी चिंता की कोई बात नहीं है। आमतौर पर सर्दी का मौसम शुरू होते ही सांस संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं। बीजिंग चिल्ड्रेन हॉस्पिटल के एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि औसत 7,000 से अधिक मामले हर दिन अस्पताल में आ रहे है। जो अस्पताल की क्षमता से बहुत अधिक है। शनिवार को तियानजिन के सबसे बड़े बाल चिकित्सा अस्पताल में रिकॉर्ड तोड़ 13,000 से अधिक बच्चे ओपीडी और आपातकालीन विभागों में इलाज के लिए आए। चीन के कई बड़े अस्पताल मरीजों से खचाखच भर गए है और हालत बेकाबू हो गए है।




