Thursday, February 5, 2026
Google search engine
HomeMaharashtraमहाराष्ट्र एफडीए को तीन महीने बाद मिला फुल-टाइम आयुक्त, श्रीधर डूबे-पाटील की...

महाराष्ट्र एफडीए को तीन महीने बाद मिला फुल-टाइम आयुक्त, श्रीधर डूबे-पाटील की नियुक्ति, बड़े सुधारों की उम्मीद

मुंबई। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषध प्रशासन (एफडीए) को करीब तीन महीने बाद आखिरकार फुल-टाइम आयुक्त मिल गया है। राज्य सरकार ने सोमवार को आईएएस अधिकारी श्रीधर डूबे-पाटील को एफडीए का स्थायी आयुक्त नियुक्त किया है। अब तक वे प्रभारी आयुक्त के रूप में यह जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जिसे अब औपचारिक रूप से फुल-टाइम नियुक्ति में तब्दील कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि पूर्व आयुक्त राजेश नार्वेकर पिछले लगभग तीन महीनों से अवकाश पर थे, जिसके चलते एफडीए का कामकाज प्रभारी व्यवस्था के तहत चल रहा था। इस अवधि में श्रीधर डूबे-पाटील, जो महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर भी रहे, को एफडीए की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब सरकार ने उन्हें ही स्थायी रूप से एफडीए आयुक्त के पद पर तैनात कर दिया है। लंबे समय तक प्रभारी व्यवस्था में विभाग चलने के कारण एफडीए के प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ने की चर्चा रही। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान विभाग में बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले भी बढ़े, जिससे निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया प्रभावित हुई। ऐसे में श्रीधर डूबे-पाटील की फुल-टाइम नियुक्ति को विभाग में प्रशासनिक मजबूती और बड़े सुधारों की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। वहीं, पूर्व आयुक्त राजेश नार्वेकर के लंबे समय तक अवकाश पर रहने को लेकर प्रशासनिक हलकों में कई सवाल उठते रहे हैं। उनके अवकाश के पीछे के कारणों को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं। सूत्रों का कहना है कि वे एफडीए के कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली से नाराज थे। एक अधिकारी के कार्यों की सराहना करने पर कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने इसे अलग रंग दिया और यह मामला विधानसभा में उछाला गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि विभाग में भ्रष्ट अधिकारियों की जड़ें कितनी गहरी हैं। यही नहीं एफ़एसओ उत्तरेश्वर बड़े जैसे अधिकारी की शिकायते कई व्यापारियों ने की। जिसकी जांच शून्य पड़ी है। हालांकि, एफडीए जैसे जनहित से सीधे जुड़े महत्वपूर्ण विभाग को अब फुल-टाइम आयुक्त मिलने से कार्यप्रणाली में तेजी और पारदर्शिता आने की उम्मीद है। प्रभारी व्यवस्था में जहां नीतिगत फैसलों और सुधारों की रफ्तार अक्सर धीमी रहती है, वहीं श्रीधर दुबे-पाटिल पहले से ही प्रभारी आयुक्त के रूप में विभाग को संभाल चुके हैं। ऐसे में उन्हें विभाग की आंतरिक समस्याओं और कार्यशैली की अच्छी जानकारी है। सरकारी और प्रशासनिक हलकों में यह उम्मीद जताई जा रही है कि श्रीधर डूबे-पाटील अपने कार्यकाल में एफडीए को अधिक प्रभावी बनाएंगे और जनहित से जुड़े मामलों में सख्ती दिखाते हुए भ्रष्टाचार पर निर्णायक कार्रवाई करेंगे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments