
पुणे। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने रविवार को घोषणा की कि पुणे जिले में 2021 से 2023 के बीच जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि वह यह जांचेंगे कि जिन लोगों को यह लाइसेंस जारी किए गए, उन्हें वास्तव में इसकी जरूरत थी या नहीं। पवार ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, मैं पुणे पुलिस विभाग से जानकारी लूंगा। पुलिस के पास लाइसेंस जारी करने और रद्द करने दोनों का अधिकार है। यह देखा जाएगा कि लाइसेंसधारकों को हथियार रखने की आवश्यकता वैध थी या नहीं। रिपोर्टों के मुताबिक, इस अवधि में पुणे में कुल 659 शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए। इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री पवार ने राज्य सरकार की चर्चित ‘मुख्यमंत्री माझी लड़की बहन योजना’ के क्रियान्वयन में आई खामियों को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि योजना शुरू करते समय चुनाव का दबाव था, जिससे गहन पात्रता निरीक्षण का समय नहीं मिल सका। उन्होंने स्पष्ट किया, हमने पहले ही अपील की थी कि केवल वही लोग आवेदन करें जो पात्र हैं। कुछ नामों में गलतियाँ हुईं, लेकिन जो भी राशि अब तक दी जा चुकी है, वह वापस नहीं ली जाएगी। हालाँकि, इस बीच एक महत्वपूर्ण विवाद खड़ा हो गया है। जानकारी के अनुसार, देवेंद्र फडणवीस सरकार 2,652 महिला सरकारी कर्मचारियों से 3.58 करोड़ रुपये की राशि वसूलने जा रही है, जिन्होंने अपात्र होते हुए भी योजना का लाभ लिया। गौरतलब है कि सरकारी कर्मचारी इस योजना के दायरे में नहीं आते। यह योजना अगस्त 2023 में शुरू की गई थी, जिसमें राज्य की 21 से 65 वर्ष की उम्र की पात्र महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। विधानसभा चुनावों से पहले महायुति सरकार की यह योजना एक लोकप्रिय सामाजिक पहल के रूप में प्रचारित की गई थी, लेकिन गलत लाभार्थियों के नामांकन ने प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।




