
मुंबई। सामाजिक और शैक्षणिक कार्य के साथ समाजप्रबोधन की परंपरा संतों ने वर्षों से संजोकर रखी है। संत परंपरा के कारण ही भारत को दुनिया में एक ऐतिहासिक पहचान मिली है, ऐसा प्रतिपादन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया। रविवार को कांदिवली (पूर्व) स्थित संतमत अनुयायी आश्रम, सिंह एस्टेट में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री बोल रहे थे। इस अवसर पर पूर्व मंत्री कृपा शंकर सिंह, पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी, विधायक अमित साटम, विधायक अतुल भातखलकर, विधायक प्रविण दरेकर, संतमत अनुयायी आश्रम ट्रस्ट के सचिव राधेश्याम यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि संतों ने अपने प्रबोधन के माध्यम से समाज की सर्वांगीण प्रगति को दिशा दी। संतों के विचारों से सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों को प्रेरणा मिली। संतमत परंपरा में मानव सेवा, समानता, प्रेम और सद्भाव केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन में आचरण करने की पद्धति है। इन मूल्यों के प्रसार के लिए श्री सद्गुरु शरणानंदजी महाराज परमहंस के अनुयायियों के माध्यम से संतमत अनुयायी आश्रम द्वारा अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संतमत अनुयायी आश्रम का कार्य समाज को सेवा और प्रेम के मार्ग पर ले जाने वाला है। मानव सेवा, समानता, प्रेम और सद्भाव जैसे मूल्यों की रक्षा में आश्रम का योगदान अमूल्य है और यही संतमत परंपरा का वास्तविक स्वरूप है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि संतमत परंपरा के परमहंस महाराजों ने जाति-पाति और भेदभाव का विरोध कर मानव धर्म को सर्वोपरि माना। उन्होंने आत्मज्ञान, अहंकार त्याग और मानव सेवा का संदेश दिया। भारतीय संस्कृति में गीता केवल एक विचारधारा नहीं, बल्कि संस्कृति और सभ्यता को संजोते हुए श्रेष्ठ जीवन जीने का मार्ग है, यह संदेश संत परंपरा ने दिया है। भारतीय संस्कृति को संरक्षित रखने का महान कार्य संत परंपरा ने किया है, ऐसा भी मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा।




