
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के संयुक्त सहयोग से राज्य में लागू की जा रही महाराष्ट्र एग्रीबिज़नेस नेटवर्क (मैग्नेट) परियोजना किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफ़पीओ) और कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है। यह जानकारी विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने दी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से विपणन निवेश, कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन और रोजगार सृजन को गति मिलेगी। बुधवार को सह्याद्री अतिथिगृह में हुई समीक्षा बैठक में एडीबी (भारत) की निदेशक मियो ओका, निदेशक ताकेशी उडेओ, क्रिशन रौटेला सहित विपणन विभाग के प्रधान सचिव प्रवीण दराडे और परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मैग्नेट 2.0 पर फोकस, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुंच का लक्ष्य
मंत्री रावल ने बताया कि ‘मैग्नेट 2.0’ के तहत राज्य के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ने के लिए उन्नत कृषि तकनीक, पोस्ट-हार्वेस्ट हैंडलिंग, बुनियादी ढांचा, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही वैश्विक कृषि मूल्य श्रृंखलाओं का अध्ययन, महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन मंडल का संस्थागत सशक्तिकरण, पोषक तत्व-आधारित बाज़ार, कार्बन क्रेडिट और जलवायु-अनुकूल नीतियों का कार्यान्वयन भी किया जा रहा है। ग्रामीण स्तर पर कृषि उपज मंडियों में आधारभूत सुविधाओं के विकास और शहरी बड़ी मंडियों में डिजिटलीकरण व ठोस कचरा प्रबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है। महिला सशक्तिकरण के लिए एडीबी के साथ और अधिक सहयोग प्राप्त करने हेतु विकसित महाराष्ट्र विज़न 2047 के अनुरूप कार्य किया जा रहा है।
एडीबी शिष्टमंडल का महाराष्ट्र दौरा, परियोजनाओं का निरीक्षण
परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए एडीबी का शिष्टमंडल 19 से 27 जनवरी 2026 के दौरान महाराष्ट्र दौरे पर रहा। क्रिशन रौटेला की अध्यक्षता में शिष्टमंडल ने विदर्भ, मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र में स्थापित चयनित प्रसंस्करण परियोजनाओं तथा तालेगांव दाभाड़े स्थित राष्ट्रीय पोस्ट-हार्वेस्ट प्रौद्योगिकी संस्थान का निरीक्षण किया। इस दौरान लाभार्थियों—विशेषकर महिला सदस्यों—से संवाद कर अपेक्षित सहयोग पर चर्चा की गई।
परियोजना के उद्देश्य और वित्तीय ढांचा
मैग्नेट परियोजना के प्रमुख उद्देश्यों में राज्य की 14 बागवानी फसलों और फूलों की मूल्य श्रृंखलाओं में निजी निवेश आकर्षित करना, किसानों की आय बढ़ाना, फलों-सब्जियों में कटाई-पश्चात नुकसान कम करना, भंडारण क्षमता बढ़ाना, मांग के अनुरूप मूल्यवर्धन और वितरण व्यवस्था को सुदृढ़ करना शामिल है। उत्पादकों और उद्यमियों को संगठित बाज़ारों तक पहुंच दिलाने के लिए तकनीकी सहायता, बुनियादी ढांचे के लिए समर्थन, मध्यम अवधि ऋण और कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई जा रही है। परियोजना का कुल वित्तीय आकार 142.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर है और कार्यान्वयन अवधि 2021-22 से 2027-28 तक निर्धारित है। समापन बैठक में विस्तृत प्रस्तुति के बाद एडीबी शिष्टमंडल ने परियोजना के उल्लेखनीय कार्यों पर संतोष व्यक्त किया और आगे भी सहयोग जारी रखने का संकेत दिया।



