
नई दिल्ली। तेजी से बदलते तकनीकी दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि शिक्षा, प्रशासन और उद्योग जगत का केंद्रीय आधार बन चुका है। भविष्य में रोजगार के अवसरों और उनके स्वरूप में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, ऐसे में महिलाओं को एआई की केवल उपयोगकर्ता नहीं बल्कि शोधकर्ता और सृजनकर्ता बनकर परिवर्तन का नेतृत्व करना चाहिए। सोमवार को यह विचार भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के अंतर्गत राष्ट्रीय महिला आयोग, अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) और संयुक्त राष्ट्र प्रशिक्षण व अनुसंधान संस्थान (यूनिटार) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विशेष सत्र ‘एआई और आर्थिक शक्ति – महिला नेतृत्व में समृद्धि की रूपरेखा’ में व्यक्त किए गए। समापन भाषण में विजया रहाटकर ने कहा कि यह चर्चा केवल संवाद नहीं बल्कि एक आंदोलन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय महिलाएं हमेशा से परिवर्तन की अगुवाई करती रही हैं और एआई जैसे नए तकनीकी क्षेत्र में भी वे पीछे नहीं रहेंगी। इसके लिए महिलाओं को उचित प्रशिक्षण, संसाधन और मजबूत तकनीकी इकोसिस्टम उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल भागीदारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीक पर स्वामित्व जरूरी है, जिसके लिए एआई साक्षरता, डेटा संरक्षण, डिजिटल नैतिकता और साइबर सुरक्षा की समझ अनिवार्य है। मंच पर यूनिटार की निदेशक मिहोको कुमामोटो, आईटीयू की एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय निदेशक अत्सुको ओकुदा, सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय के प्रधान सचिव एवं महानिदेशक ब्रिजेश सिंह तथा संगीतकार-निर्माता कार्तिक शाह उपस्थित रहे। प्रधान सचिव एवं महानिदेशक ब्रिजेश सिंह ने एआई से जुड़े डिजिटल खतरों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एआई प्रणालियाँ अक्सर पुरुष-प्रधान डेटा पर आधारित होती हैं, जिससे संवेदनशीलता और समानता में कमी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि ‘डीपफेक’ तकनीक के 91 प्रतिशत पीड़ित महिलाएं हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने और एआई जनित कंटेंट पर अनिवार्य वॉटरमार्क लागू करने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि भारत में 2021 के नियमों के तहत पीड़ितों को नोडल अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराने की सुविधा दी गई है और आपत्तिजनक सामग्री निर्धारित समय में हटाना अनिवार्य किया गया है। यूनिटार की मिहोको कुमामोटो ने क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे महिलाओं को एआई आधारित वैश्विक अवसरों का लाभ मिलेगा। आईटीयू की अत्सुको ओकुदा ने द्वितीय व तृतीय श्रेणी के शहरों में डिजिटल समावेशन बढ़ाने और डिजिटल विभाजन कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, एआई संगीत निर्माता कार्तिक शाह ने रचनात्मक एवं डिजिटल अर्थव्यवस्था में महिलाओं के लिए बढ़ते अवसरों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की शुरुआत महिला सशक्तिकरण पर आधारित एआई विषयक लघु फिल्म के प्रदर्शन से हुई। सत्र का संचालन सलोनी लखिया ने किया, जबकि आकांक्षा ने वक्ताओं का परिचय कराया। विशेषज्ञों ने इस बात पर सहमति जताई कि एआई आधारित भविष्य में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व ही सतत व समावेशी आर्थिक विकास की कुंजी बनेगा।




