
इंद्र यादव
रायगढ़। रायगढ़ के खोपोली शहर में शुक्रवार की सुबह लोकतंत्र और इंसानियत दोनों को शर्मसार कर देने वाली वारदात सामने आई, जब शिवसेना (शिंदे गुट) की नवनिर्वाचित नगरसेविका मानसी कालोखे के पति मंगेश कालोखे की दिनदहाड़े निर्मम हत्या कर दी गई। रोज़ की तरह सुबह करीब सात बजे मंगेश अपनी मासूम बेटी को स्कूल छोड़कर घर लौट रहे थे, लेकिन विहारी इलाके में घात लगाए बैठे हमलावरों ने उनकी जिंदगी का सफर वहीं खत्म कर दिया। एक काली कार से आए पांच नकाबपोश बदमाशों ने कोयता, तलवार और कुल्हाड़ी जैसे धारदार हथियारों से उन पर ताबड़तोड़ हमला किया। 38 सेकंड के सीसीटीवी फुटेज में कैद इस हैवानियत में मंगेश जान बचाने के लिए भागते दिखते हैं, लेकिन हमलावर उन्हें घेरकर तब तक वार करते रहे, जब तक उनकी मौके पर ही मौत नहीं हो गई। सड़क पर फैला खून और शव उस खूनी राजनीति की तस्वीर बन गया, जहाँ वैचारिक विरोध की जगह शारीरिक सफाए का रास्ता चुना गया। इस जघन्य हत्याकांड के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को पीड़ित परिवार से मुलाकात कर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती है; दोषियों पर मकोका लगाया जाएगा, मामला फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलेगा और किसी भी राजनीतिक रसूख को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की प्राथमिक जांच और स्थानीय चर्चाओं में हत्या की वजह हालिया नगर परिषद चुनाव की रंजिश बताई जा रही है, जिसमें मानसी कालोखे ने एनसीपी (अजीत पवार गुट) की उम्मीदवार को हराया था। अब तक रविंद्र देवकर और उसके बेटे सहित 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि एनसीपी जिला अध्यक्ष सुधाकर घारे का नाम एफआईआर में आने से राजनीतिक हलकों में हलचल मची है। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है, लेकिन एक बेटी के सिर से उठ चुका पिता का साया, एक पत्नी का उजड़ा संसार और खोपोली में पसरा डर यह सवाल छोड़ गया है कि क्या सत्ता की लड़ाई में अब इंसानी जान की कोई कीमत नहीं रह गई है।



