
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने आगामी केरल विधानसभा चुनावों को लेकर आक्रामक रणनीति अपनाते हुए 140 में से 100 सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है। पार्टी का सीधा मुकाबला सत्तारूढ़ वामपंथी गठबंधन एलडीएफ से माना जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को उम्मीद है कि वह पिछले एक दशक से सत्ता में काबिज एलडीएफ के शासन का अंत करेगा। चुनाव अप्रैल या मई महीने में होने की संभावना है। इसी रणनीति के तहत शुक्रवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में यूडीएफ के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे, चुनाव प्रचार की रूपरेखा, मतदाता सूची के त्वरित और गहन संशोधन के प्रभाव समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। पार्टी ने तय किया है कि इस बार चुनावी अभियान में महिलाओं और युवाओं के मुद्दों को केंद्र में रखा जाएगा। बैठक में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि पश्चिम बंगाल में वामपंथी दलों के साथ किसी भी संभावित समझौते का इस्तेमाल भाजपा केरल में यूडीएफ को घेरने के लिए कर सकती है। हालांकि पार्टी नेताओं ने स्पष्ट किया कि केरल में यूडीएफ पूरी तरह एकजुट है और चुनाव मजबूती से लड़ा जाएगा। गौरतलब है कि राहुल गांधी ने 19 जनवरी को एर्नाकुलम में यूडीएफ के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, जहां हाल ही में संपन्न स्थानीय निकाय चुनावों में विपक्ष की जीत का जश्न मनाया गया। इन चुनावों को विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल माना जा रहा था। दिसंबर 2025 में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में यूडीएफ ने केरल में चार नगर निगमों और 500 से अधिक पंचायतों में जीत दर्ज की थी। कांग्रेस के केरल प्रभारी पी.वी. मोहन ने कहा कि पार्टी का मुख्य फोकस युवाओं के लिए रोजगार और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि एलडीएफ ने पिछले 10 वर्षों में राज्य के विकास की उपेक्षा की है। मोहन ने कहा कि यूडीएफ का चुनाव प्रचार आक्रामक जरूर होगा, लेकिन सकारात्मक एजेंडे पर आधारित रहेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में यूडीएफ को रोकने के लिए सीपीआई-एम और भाजपा ने एक-दूसरे की मदद की थी और आगामी विधानसभा चुनावों में भी ऐसा हो सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सीपीआई-एम और भाजपा दोनों की “विभाजनकारी राजनीति” के खिलाफ लड़ रही है। कांग्रेस सांसद बेनी बेहनन ने कहा कि पिछले एक दशक में राज्य सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार से जनता नाराज है और सत्ता परिवर्तन चाहती है। उन्होंने दावा किया कि यूडीएफ के खिलाफ झूठा प्रचार किया जा रहा है, लेकिन मतदाता सच्चाई को समझते हैं। हालांकि, इस अहम बैठक से तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया। बताया जा रहा है कि वे पहले से तय कार्यक्रम के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके थे। पार्टी नेताओं ने साफ किया कि थरूर की अनुपस्थिति कोई मुद्दा नहीं है और वे पार्टी से पूरी तरह संतुष्ट हैं। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पर कहा कि केरल की 3.6 करोड़ जनता बदलाव चाहती है और कांग्रेस अपने यूडीएफ सहयोगियों के साथ मिलकर प्रगतिशील, विकासोन्मुखी और कल्याणकारी शासन देने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ेगी और 100 से अधिक सीटें जीतने का भरोसा है। कुल मिलाकर, कांग्रेस और यूडीएफ ने केरल विधानसभा चुनाव को लेकर पूरी ताकत झोंकने का संकेत दे दिया है, जिससे राज्य की राजनीति में मुकाबला और तेज होने के आसार हैं।




