
नई दिल्ली। भारत को आज अपना नया मुख्य न्यायाधीश मिला। जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई ने बुधवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक औपचारिक समारोह में देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ग्रहण की। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री सहित केंद्रीय कैबिनेट के शीर्ष मंत्रीगण उपस्थित थे और समारोह का सीधा प्रसारण सरकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर किया गया। जस्टिस गवई अनुसूचित जाति समुदाय से इस पद पर नियुक्त होने वाले दूसरे व्यक्ति हैं। इससे पूर्व जस्टिस के.जी.बालकृष्णन ने वर्ष 2007 में यह पद संभाला था। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस गवई मुख्य न्यायाधीश बनने वाले पहले बौद्ध हैं, जो भारतीय न्यायपालिका के सामाजिक समावेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
संक्षिप्त कार्यकाल, पर व्यापक प्रभाव की उम्मीद
नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गवई 23 नवंबर 2025 तक इस पद पर रहेंगे। हालांकि उनका कार्यकाल लगभग छह महीने का है, फिर भी न्यायिक दृष्टि से यह अत्यंत निर्णायक समय माना जा रहा है। दो दिन पूर्व दिए एक वक्तव्य में उन्होंने स्पष्ट किया था कि सेवानिवृत्ति के बाद वे कोई भी पद स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का संकेत मिलता है।
व्यक्तिगत और पेशेवर पृष्ठभूमि
जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ। उन्होंने 16 मार्च 1985 को वकालत शुरू की और प्रारंभिक वर्षों में बॉम्बे उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस की। बाद में उन्होंने मुख्य रूप से नागपुर पीठ में संवैधानिक और प्रशासनिक कानूनों पर काम किया। वे नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के स्थायी वकील भी रहे। उनके पिता रामकृष्ण सूर्यभान गवई, जिन्हें ‘दादा साहब गवई’ के नाम से जाना जाता है, बिहार के राज्यपाल और एक प्रमुख दलित नेता रह चुके हैं। जस्टिस गवई को वर्ष 2003 में बॉम्बे हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और नवंबर 2005 में वे स्थायी न्यायाधीश बने। 24 मई 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किया गया।



