
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने विले पार्ले स्थित श्री 1008 दिगंबर जैन मंदिर को अंतरिम संरक्षण प्रदान करते हुए बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को मंदिर के आगे किसी भी तरह के विध्वंस कार्य से रोक दिया है। यह आदेश मंदिर ट्रस्ट द्वारा बीएमसी की कार्रवाई के खिलाफ दायर अपील के बाद आया है। न्यायमूर्ति गौरी गोडसे ने 30 अप्रैल तक मंदिर की वर्तमान स्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है, ताकि ट्रस्ट की अपील पर उचित सुनवाई हो सके। बीएमसी ने महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम (MRTP) और मुंबई नगर निगम अधिनियम (MMC) के तहत नोटिस जारी कर मंदिर का आंशिक विध्वंस किया था। इससे पहले सिविल कोर्ट ने ट्रस्ट की अंतरिम संरक्षण याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन 15 अप्रैल तक अस्थायी राहत दी गई थी। इसके बाद बीएमसी ने पुलिस की मौजूदगी में विध्वंस शुरू किया, जिसमें मंदिर की बाहरी दीवारों का कुछ हिस्सा ध्वस्त हुआ, जबकि मुख्य संरचना अब भी सुरक्षित है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेल शाह ने ट्रस्ट की ओर से दलीलें पेश कीं, जबकि बीएमसी का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता द्रुपद पाटिल ने किया। हाईकोर्ट ने माना कि ट्रस्ट को अभी तक उनके आवेदनों पर कोई तर्कपूर्ण आदेश प्राप्त नहीं हुआ है, इसीलिए उन्हें अपील पर सुनवाई का अधिकार है। अदालत ने बीएमसी को दो सप्ताह में हलफनामा और विध्वंस से संबंधित पंचनामा प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपीलकर्ताओं को जब तक सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक विध्वंस से अंतरिम संरक्षण मिलेगा, और 30 अप्रैल को अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनी रहेगी।




