
पुणे। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की उम्मीदवार सोनाली आंदेकर, जो इस समय न्यायिक हिरासत में हैं, ने पुणे नगर निगम (पीएमसी) के वार्ड नंबर 23 (रविवार पेठ–नाना पेठ) से चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया है। सोनाली आंदेकर ने शिवसेना नेता रविंद्र धांगेकर की पत्नी प्रतिभा धांगेकर को पराजित किया। सोनाली आंदेकर की जीत को लेकर चुनाव से पहले ही राजनीतिक गलियारों में जबरदस्त चर्चा थी। खासतौर पर इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं कि क्या जेल में रहते हुए वह चुनाव जीत पाएंगी या नहीं। नतीजों ने इन तमाम अटकलों को खारिज कर दिया और यह साफ कर दिया कि उन्हें क्षेत्र की जनता का मजबूत समर्थन प्राप्त है। इस जीत ने इसलिए भी ज्यादा ध्यान खींचा क्योंकि एनसीपी नेता अजीत पवार को एक ऐसे परिवार के सदस्य को टिकट देने को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था, जिसे विपक्ष ने “आपराधिक पृष्ठभूमि वाला परिवार” करार दिया था। बावजूद इसके, मतदाताओं ने सोनाली आंदेकर के पक्ष में मतदान कर राजनीतिक संदेश दिया है।
इसी वार्ड से लक्ष्मी आंदेकर ने भी जीत दर्ज की है, जिससे आंदेकर गुट की स्थिति और मजबूत हो गई है। उधर, रविंद्र धांगेकर, जो हाल ही में शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हुए थे, ने इस चुनाव में अपनी पत्नी और बेटे दोनों को मैदान में उतारा था। जहां प्रतिभा धांगेकर वार्ड 23 से चुनाव लड़ रही थीं, वहीं उनके बेटे प्रणव धांगेकर ने वार्ड नंबर 24 से किस्मत आजमाई। वार्ड नंबर 23 में मुकाबला बहुकोणीय था। यहां सोनाली आंदेकर (एनसीपी), विजया काद्रे (आम आदमी पार्टी), अनुराधा मांचे (बीजेपी) और निकिता मार्टकर (शिवसेना, उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) सहित कई उम्मीदवार मैदान में थीं। हालांकि, वास्तविक मुकाबला आंदेकर गुट और धांगेकर गुट के बीच ही माना जा रहा था। सोनाली आंदेकर की जीत को पुणे की स्थानीय राजनीति में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है, जिसने न केवल दलगत समीकरणों को प्रभावित किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि स्थानीय मुद्दे और जनसमर्थन कई बार विवादों और आलोचनाओं पर भारी पड़ जाते हैं।



