
उन्नाव, उत्तर प्रदेश। पंचायत स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में जिला प्रशासन ने बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। वर्ष 2017-18 की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर एक ही विकासखंड सहित जिले के आठ विकासखंडों में तैनात रहे 19 ग्राम विकास अधिकारियों/ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों से कुल 1 करोड़ 19 लाख 78 हजार 633 रुपये 95 पैसे की वसूली के आदेश जारी किए गए हैं। यह राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन से काटकर वसूल की जाएगी। ऑडिट रिपोर्ट में विकास कार्यों, सामग्री क्रय, भुगतान और अन्य मदों में गंभीर वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई थीं। इन अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) ने रिकवरी का आदेश पारित किया। यह कार्रवाई जिला विकास अधिकारी देव कुमार चतुर्वेदी के निर्देश पर की गई है। उन्होंने बताया कि सभी संबंधित खंड विकास अधिकारियों को वसूली संबंधी आदेश और नामवार/ग्राम पंचायतवार विस्तृत सूची भेज दी गई है, ताकि प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरी हो सके। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, हसनगंज विकासखंड में सबसे अधिक रिकवरी प्रस्तावित है। यहां आदमपुर बरेठी के संदीप यादव से 2,89,642 रुपये, रानीखेड़ा खालास के अनिल शर्मा से 10,75,176.95 रुपये, अजमतगढ़ी के संदीप यादव से 1,02,475.50 रुपये, जसमड़ा बब्बन के संदीप यादव से 1,12,506 रुपये, रसूलपुर बकिया के संदीप यादव से 20,58,237.50 रुपये की वसूली तय की गई है। सफीपुर विकासखंड में ग्राम पंचायत मऊ मंसूरपुर और जुझारपुर के तत्कालीन ग्राम पंचायत विकास अधिकारी महेंद्र भूषण सक्सेना से क्रमशः 12,291.50 रुपये और 12,187.05 रुपये की रिकवरी होगी।
असोहा विकासखंड के इस्माइलपुर में तैनात रहे पवन मौर्य से 54,914.50 रुपये की वसूली प्रस्तावित है।
औरास विकासखंड में बयारी के विपिन कुमार से 72,750 रुपये, बिसवल के संजीव कुमार से 28,962.50 रुपये और अहमदपुर कासिमपुर के विपिन कुमार से 4,14,069.50 रुपये की रिकवरी होगी।
बीघापुर विकासखंड में गढ़ेवा के शिवबरन सिंह से 14,46,982 रुपये और भैरमपुर के इंद्रपाल से 2,55,845.50 रुपये वसूले जाएंगे। सिकंदरपुर कर्ण विकासखंड में मनोहरपुर के ग्राम विकास अधिकारी से 19,609.50 रुपये तथा रजुवाखेड़ा के समीर तिवारी से 17,68,559 रुपये की रिकवरी तय है। बिछिया विकासखंड में नेवरना के अमरेश मिश्रा से 21,40,446.50 रुपये, तारागांव से 14,89,067 रुपये और इटौली से 5,15,120 रुपये की वसूली प्रस्तावित है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकारी धन के दुरुपयोग को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भविष्य में भी ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ इसी तरह की कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।




