
उन्नाव, उत्तर प्रदेश। विकास कार्यों में मनमानी का एक गंभीर मामला सामने आया है। बांगरमऊ तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत जामड़ में ग्राम प्रधान और सचिव ने मिलकर राजस्व अभिलेखों में दर्ज मात्र चार फीट चौड़ी पगडंडी पर मनरेगा योजना के तहत करीब 12 फीट चौड़े कच्चे मार्ग का निर्माण करा दिया। इस अवैध निर्माण के चलते किसानों के खेतों में खड़ी लाखों रुपये की गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। किसानों की शिकायत पर उपजिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य पर रोक लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत जामड़ में पड़ोसी गांव जिरिकपुर और फरीदपुर कट्टर के कई काश्तकारों की खेतिहर भूमि स्थित है। पीड़ित किसानों गनेशी, विजयी, रमेशचंद्र, बेचेलाल, मानदेवी, रामचंद्र, फूलकली और वेद कुमार सहित अन्य ने उपजिलाधिकारी बांगरमऊ बृजमोहन शुक्ला को शिकायती पत्र सौंपकर बताया कि उनके खेतों के बीच से गुजरने वाली पगडंडी राजस्व विभाग के मानचित्र में केवल चार फीट चौड़ी दर्ज है। आरोप है कि इसी पगडंडी पर ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव द्वारा मनरेगा योजना से नियमों को ताक पर रखकर लगभग 12 फीट चौड़ा कच्चा मार्ग जबरन बनवाया जा रहा है।
किसानों का कहना है कि इस निर्माण के कारण करीब आधा दर्जन किसानों की खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है और यदि निर्माण कार्य को तुरंत नहीं रोका गया तो आसपास के दर्जनों किसानों की भी लाखों रुपये की फसल बर्बाद हो जाएगी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उपजिलाधिकारी बृजमोहन शुक्ला ने खंड विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह को कच्चे मार्ग के निर्माण पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम के आदेश के बाद फिलहाल निर्माण कार्य रुक गया है, लेकिन पीड़ित किसानों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और फसल क्षति का मुआवजा दिए जाने की मांग की है। मामले ने मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों की पारदर्शिता और निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।



