
मुंबई। दावोस 2025 में महाराष्ट्र के साथ हुए कुल 17 समझौतों को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल उपसमिति की बैठक में मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं को थ्रस्ट सेक्टर और उच्च तकनीकी नीति के आधार पर अतिरिक्त विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे, साथ ही सामूहिक प्रोत्साहन योजना भी लागू की जाएगी। दो अन्य परियोजनाओं को उनके निवेश के आधार पर विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे। इन 19 परियोजनाओं से राज्य में ₹3,92,056 करोड़ का नया निवेश आएगा और इससे 1,11,725 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे, जबकि अनुमानित रूप से 2.5 से 3 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल उपसमिति की 11वीं बैठक आज विधान भवन के समिति कक्ष में हुई। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री और वित्त एवं योजना मंत्री अजित पवार, उद्योग मंत्री उदय सामंत और मुख्य सचिव सुजाता सौनिक उपस्थित थे। इस दौरान कुल 21 विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में 22 फरवरी 2024 के शासन निर्णय में सुधार करते हुए राज्य में हो रहे नए निवेश और रोजगार सृजन को देखते हुए, थ्रस्ट सेक्टर और उच्च तकनीकी पर आधारित परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाने की मंजूरी दी गई। राज्य में अब इन परियोजनाओं की संख्या 10 से बढ़ाकर 22 कर दी गई है। दावोस 2025 में उद्योग विभाग से संबंधित कुल 51 समझौतों में से मंत्रिमंडल उपसमिति की बैठक में 17 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इसके अलावा, पिछले दो महीनों में कुल 9 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। इस प्रकार, कुल 26 परियोजनाओं के लिए शासन स्तर पर दो महीने में कार्यवाही पूरी की गई है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य में आगामी समय में 6 लाख करोड़ रूपए का निवेश और 2 लाख प्रत्यक्ष व 3 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। थ्रस्ट सेक्टर और उच्च तकनीकी पर आधारित सेमीकंडक्टर चिप्स और वेफर्स, इलेक्ट्रिक वाहन, लिथियम आयन बैटरी, अंतरिक्ष और रक्षा सामग्री निर्माण, हरित स्टील परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन देने के प्रस्ताव मंत्रिमंडल उपसमिति में विचार किए गए। इन परियोजनाओं से तकनीकी नवाचार, अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिलेगा और एक मजबूत स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण होगा, जिससे मराठवाड़ा के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को लाभ मिलेगा, मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर बताया। इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में महत्वपूर्ण कमी आएगी, जिससे सेमीकंडक्टर, स्टील और इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश होगा और रोजगार उत्पन्न होंगे। इसका लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था और राज्य के विकास को होगा, साथ ही तकनीकी नवाचार, अनुसंधान और विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे सूक्ष्म, लघु उद्योगों को रोजगार क्षमता और उभरती तकनीकों में कौशल विकास में भी मदद मिलेगी, उन्होंने कहा। इस बैठक में अपर मुख्य सचिव (योजना) राजगोपाल देवरा, अपर मुख्य सचिव (वित्त) ओ. पी. गुप्ता, सचिव (उद्योग) पी. अन्बलगन, विकास आयुक्त (उद्योग) दीपेंद्र सिंह कुशवाह और महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आर. वेलारासू उपस्थित थे।




