
पुणे। महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य के लिए गहरे दुख से भरे सप्ताह के बीच उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजीत पवार ने सोमवार को कराड स्थित प्रीतिसंगम घाट पर महाराष्ट्र के पहले मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद यह उनकी इस ऐतिहासिक स्थल की पहली आधिकारिक यात्रा थी। प्रीतिसंगम घाट का महाराष्ट्र की राजनीति में विशेष भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व है। यह स्थल उनके दिवंगत पति अजीत पवार के भी अत्यंत निकट रहा है, जो यशवंतराव चव्हाण की राजनीतिक विरासत से लंबे समय से जुड़े रहे थे। ऐसे समय में, जब राज्य हालिया दुखद घटनाओं से उबरने की कोशिश कर रहा है, सुनेत्रा पवार की यह यात्रा न केवल राजनीतिक दृष्टि से बल्कि भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर, रायगढ़ के सांसद सुनील तटकरे, राज्यसभा सांसद नितिन पाटिल, पूर्व सांसद श्रीनिवास पाटिल, पूर्व विधायक बालासाहेब पाटिल, सतारा जिला कलेक्टर संतोष पाटिल, सतारा पुलिस अधीक्षक तुषार दोषी, कराड नगर परिषद अध्यक्ष राजेंद्र सिंह यादव सहित कई वरिष्ठ नेता, अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह यात्रा बारामती में हुए दुखद विमान हादसे के कुछ ही दिनों बाद हुई, जिसमें अजीत पवार और उनके निजी सुरक्षा अधिकारी विदित जाधव सहित तीन अन्य लोगों की जान चली गई थी। निजी शोक के बावजूद, सुनेत्रा पवार ने अपने सार्वजनिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए पहले सतारा जिले की फलटन तहसील के ताराडगांव गांव जाकर दिवंगत पीएसओ विदित जाधव के परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने जाधव की पत्नी और बच्चों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी और भावनात्मक समर्थन प्रदान किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह मुलाकात अत्यंत भावुक रही। उपमुख्यमंत्री ने परिवार को आश्वस्त करते हुए कहा, “किसी भी कठिन समय में मेरा पूरा परिवार और मैं आपके साथ खड़े हैं।” उनके इन शब्दों ने वहां मौजूद कई लोगों को भावुक कर दिया। परिवार के अनुसार, विदित जाधव वर्ष 2019 से अजीत पवार के निजी सुरक्षा अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले उन्होंने 2016 से 2019 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सुरक्षा जिम्मेदारियां भी निभाई थीं। महाराष्ट्र पुलिस बल में वे अपने अनुशासन, शांत स्वभाव और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा के लिए व्यापक रूप से सम्मानित थे। सुनेत्रा पवार की यह पूरी यात्रा एक ऐसे समय में हुई है, जब राज्य राजनीतिक नेतृत्व के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं की भी गंभीर परीक्षा से गुजर रहा है। इसे शोक, कर्तव्य और परंपरा — तीनों के संतुलन के रूप में देखा जा रहा है।




