
मुंबई। चाकण नगर परिषद अंतर्गत महाराष्ट्र सुवर्ण जयंती नगरोत्थान अभियान के तहत शुरू की गई जलप्रदाय (पानी आपूर्ति) परियोजना को लेकर विधानसभा में बड़ा खुलासा हुआ। सोमवार को प्रश्नोत्तर काल के दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बताया कि एक ही कार्य को दो अलग-अलग योजनाओं के तहत मंजूरी दी गई है, जो गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच विभागीय आयुक्त के माध्यम से की जाएगी और निष्कर्षों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। यह मामला उस वक्त उजागर हुआ जब सदस्य भास्कर जाधव ने विधानसभा में प्रश्न उठाया। शिंदे ने बताया कि जिला स्तरीय योजना के अंतर्गत इस परियोजना को 24 फरवरी 2024 को प्रशासनिक मंजूरी मिली और 13 मार्च 2024 को वर्क ऑर्डर जारी हुआ। हालांकि, कार्य की धीमी प्रगति के चलते नगर परिषद ने ठेकेदार पर विलंबदंड लगाने का निर्णय लिया। बाद में पता चला कि राज्य स्तरीय योजना के अंतर्गत भी उसी कार्य के लिए आदेश जारी किए गए हैं, जिसके बाद 13 मई 2025 को सभी संबंधित विभागों को काम रोकने का निर्देश दे दिया गया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि राज्य स्तरीय योजना के तहत अब तक कोई भुगतान नहीं हुआ है। इसी सत्र में उपमुख्यमंत्री शिंदे ने राज्य की नगरपालिकाओं और महानगरपालिकाओं के सामने मौजूद कचरा प्रबंधन की चुनौतियों पर जवाब देते हुए कहा कि इसके समाधान के लिए नगर विकास विभाग में एक स्वतंत्र सेल की स्थापना की जाएगी। यह घोषणा सदस्य विजय देशमुख द्वारा उठाए गए प्रश्न के उत्तर में की गई। पूरक प्रश्नों में अभिमन्यू पवार और अर्जुन खोतकर ने भी इस मुद्दे को उठाया। शिंदे ने बताया कि सोलापुर शहर में प्रतिदिन 300 टन कचरा सोलापुर बायोएनेर्जी कंपनी लिमिटेड द्वारा वैज्ञानिक तरीके से निपटाया जा रहा है। इस परियोजना में गीले कचरे से बायोगैस और खाद तैयार होती है जबकि सूखे कचरे को प्रोसेसिंग उद्योगों को भेजा जाता है। उन्होंने सभी महानगरपालिकाओं में कचरे के वर्गीकरण और समुचित निपटान की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि छोटी नगर परिषदों को विशेष सहायता दी जाएगी। महानगरपालिकाओं में आखिरी समय में लिए गए ठरावों (प्रस्तावों) की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इनकी जांच नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव से करवाई जाएगी। राज्यमंत्री श्रीमती मिसाळ ने जानकारी दी कि सोलापुर में घर-घर से कचरा एकत्र करने के लिए घंटागाड़ी प्रणाली लागू की गई है, लेकिन कुछ झोपड़पट्टी क्षेत्रों में अब भी कचरा जमा होने की समस्या बनी हुई है। उन्होंने बताया कि सोलापुर में अब तक लगभग 7 लाख टन डंप किए गए कचरे में से 5 लाख टन उठाया जा चुका है। यह पूरा घटनाक्रम राज्य के शहरी प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की आवश्यकता की ओर संकेत करता है और सरकार की ओर से ठोस उपायों के आश्वासन के साथ समाप्त हुआ।




