
मुंबई। राज्य की बालिकाओं को गर्भाशय मुख (सर्वाइकल) कैंसर से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से 9 से 14 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 9 लाख 84 हजार लड़कियों को एचपीवी प्रतिबंधक टीका लगाने के अभियान का शुभारंभ मुंबई में किया गया। रविवार को इस अभियान के साथ ही ‘पिंक ओपीडी’ की भी शुरुआत उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हाथों हुई। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, बदलती खानपान की आदतें और बढ़ते तनाव के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे में बीमारी होने के बाद उपचार करने की बजाय “प्रिवेंशन इज़ बेटर दैन क्योर” के सिद्धांत के अनुसार रोकथाम के उपाय करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एचपीवी टीकाकरण इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम है। उन्होंने बताया कि राज्य में 9 से 14 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं को एचपीवी टीका देने का यह व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जिससे गर्भाशय मुख के कैंसर पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। वैश्विक स्तर पर कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है, ऐसे में राज्य सरकार इस दिशा में सक्रिय कदम उठा रही है।
‘माता सुरक्षित तो परिवार सुरक्षित’
मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू किए गए ‘माता सुरक्षित तो परिवार सुरक्षित’ अभियान का उल्लेख करते हुए शिंदे ने बताया कि इस पहल के तहत 3 करोड़ महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई थी। इनमें लगभग 10 हजार महिलाओं में कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान हुई। बीमारी का प्रारंभिक चरण में पता चलने से अनेक महिलाओं की जान बचाना संभव हुआ। उन्होंने बताया कि हाल ही में शुरू की गई मैमोग्राफी जांच की आठ मोबाइल वैन के माध्यम से गांव-गांव में जांच अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 2 करोड़ 91 लाख महिलाओं की जांच की जा चुकी है। आवश्यकता पड़ने पर ऐसी और गाड़ियां उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रयास करेगी। शिंदे ने बताया कि राज्य के कई अस्पतालों की इमारतें 60 से 70 प्रतिशत तक बन चुकी हैं और उन्हें जल्द से जल्द पूर्ण करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए एडीबी बैंक और वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाओं से कम ब्याज दर पर आर्थिक सहायता प्राप्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पीपीपी मॉडल से स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल को भी मंजूरी दी गई है। नामांकित संस्थाओं के सहयोग से आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे आम नागरिकों को भी बेहतर उपचार उपलब्ध हो सकेगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ‘शासन आपके द्वार’ अभियान के माध्यम से लगभग 5 करोड़ नागरिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला। इसी तर्ज पर अब हिंदुहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे की जन्मशताब्दी के अवसर पर ‘आरोग्य आपके द्वार’ अवधारणा को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसके तहत स्वास्थ्य सेवाएं सीधे लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सहायता निधि से 70 से 80 हजार मरीजों को लगभग 450 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई थी। वर्तमान में भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में इस निधि के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को सहायता दी जा रही है।
महिला सशक्तिकरण पर जोर
शिंदे ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। इसके तहत ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना’, ‘लाडकी लखपती योजना’, एसटी यात्रा में 50 प्रतिशत छूट और नाम के साथ मां का नाम जोड़ने जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा तभी परिवार और समाज मजबूत रहेगा। घर की रीढ़ मां, बहन और पत्नी होती हैं, इसलिए उनके स्वास्थ्य की देखभाल करना समाज की जिम्मेदारी है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला डॉक्टरों, सर्जनों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर, स्वास्थ्य राज्यमंत्री मेघना बोर्डीकर, स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव निपुण विनायक, स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. कांदबरी बलकवड़े सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।




