
मुंबई। किशोर अपराधियों के अधिकारों और उनके पुनर्वास को सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए उद्योगपति और समाजसेवी अज़ीम प्रेमजी द्वारा प्रस्तावित योजना को महाराष्ट्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत राज्य भर के निरीक्षण गृहों (Observation Homes) में हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएंगे, जो किशोर अपराध में संलिप्त बच्चों को कानूनी, सामाजिक और परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए कहा कि यह पहल किशोरों के प्रति सहानुभूति और पुनर्वास की भावना को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चे जो अपराध में फंसे होते हैं, वे अक्सर सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग से आते हैं और उन्हें न तो पर्याप्त कानूनी जानकारी होती है और न ही सही मार्गदर्शन। कई बार वकीलों द्वारा गुमराह किए जाने, सामाजिक कलंक और मानसिक दबाव के कारण वे न्याय से वंचित रह जाते हैं। इस पहल को टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (TISS) के किशोर न्याय संसाधन प्रकोष्ठ (RCJJ) और महाराष्ट्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के सहयोग से लागू किया जाएगा। हेल्प डेस्क किशोर न्याय बोर्ड, वकीलों, बाल कल्याण समितियों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय में कार्य करेंगी। प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की मदद से ये सेवाएं सतत रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी। पहले चरण में यह कार्यक्रम नागपुर, यवतमाल, लातूर, पुणे और ठाणे में शुरू किया जाएगा। इसका लक्ष्य प्रति वर्ष कम से कम 4,000 किशोरों तक पहुँचना है। इसके सफल क्रियान्वयन के बाद यह पहल राज्य के सभी जिलों में विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के सहयोग से विस्तार पायेगी। फडणवीस ने कहा, यह केवल मानवाधिकार का विषय नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक जिम्मेदारी है। किशोर अपराधियों को पुनः समाज की मुख्यधारा में लाना और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना हमारी प्राथमिकता है।




