
मुंबई। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग ने 5 करोड़ 64 लाख रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले का पर्दाफाश करते हुए एक ट्रेडिंग फर्म के मालिक को बुधवार को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि यह फर्म वस्तुओं या सेवाओं का वास्तविक लेन-देन किए बिना ही आईटीसी का दावा कर रही थी। सूत्रों के अनुसार, यह फर्म 16 अप्रैल 2025 को जीएसटी अधिनियम के तहत पंजीकृत हुई थी। विभागीय जांच में पता चला कि गैर-मौजूद संस्थाओं के माध्यम से 15.22 करोड़ रुपये का फर्जी टैक्स क्रेडिट हासिल किया गया था। इसके अलावा, बिना किसी वस्तु या सेवा की आपूर्ति के 42 लाख रुपये के अतिरिक्त आईटीसी को जीएसटी रिटर्न में दर्शाया गया था। कार्रवाई के दौरान, मुंबई में पंजीकृत 27 अलग-अलग कंपनियों से जुड़े खाली हस्ताक्षरित फॉर्म, खाली चेकबुक और खरीद-बिक्री के चालान जब्त किए गए, जिनका मेसर्स साल्वे ट्रेडर्स से कोई संबंध नहीं था। यह कार्रवाई राज्य जीएसटी विभाग द्वारा फर्जी चालान और फर्जी टर्नओवर के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई।
ऑपरेशन का नेतृत्व राज्य कर उपायुक्त यास्मीन अजीम मोलकर के मार्गदर्शन में सहायक राज्य कर आयुक्त सुजीत कक्कड़, संतोष खेड़कर, संतोष लोंढे, दीप्ति पिलारे और राज्य कर निरीक्षक व कर सहायक की टीम ने किया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक राज्य माल एवं सेवा कर विभाग 11 गिरफ्तारियां कर चुका है और कर चोरी, फर्जी चालान, झूठे टर्नओवर व अवैध आईटीसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखे हुए है।