
मुंबई। महाराष्ट्र के पंप स्टोरेज आधारित उदंचन जलविद्युत परियोजनाओं को नई दिशा देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में राज्य सरकार ने मंगलवार को जल संसाधन विभाग के माध्यम से चार महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। कुल 6,450 मेगावाट की इन परियोजनाओं में 31,955 करोड़ रूपए का निवेश होगा, जिससे राज्य को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय बढ़त मिलेगी और लगभग 15,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। विधान भवन के कैबिनेट हॉल में आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, गिरीश महाजन, आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक वुइके, विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कपूर, सचिव संजय बेलसारे और महाराष्ट्र कृष्णा बेसिन विकास निगम के कार्यकारी निदेशक अतुल कपोले भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र ने पंप स्टोरेज नीति में गतिशील दृष्टिकोण अपनाकर देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है और अब तक कुल 50 परियोजनाओं पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, जिनसे 68,815 मेगावाट बिजली उत्पादन, ₹3.75 लाख करोड़ निवेश और 1.11 लाख रोजगार के अवसर संभावित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नेट-ज़ीरो’ लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र ने 2030 तक अपनी 50% बिजली जरूरतें नवीकरणीय स्रोतों से पूरी करने का संकल्प लिया है। पंप स्टोरेज, ग्रिड स्थिरता बनाए रखने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। चार कंपनियों के साथ हुए नए समझौतों में छत्रपति संभाजीनगर की 2,000 मेगावाट क्षमता वाली ग्रीनको परियोजना में ₹9,600 करोड़ निवेश और 6,000 नौकरियां, कोल्हापुर की 1,200 मेगावाट ऋत्विक परियोजना में ₹7,405 करोड़ निवेश और 2,600 नौकरियां, अमरावती की 1,500 मेगावाट अदानी परियोजना में ₹8,250 करोड़ निवेश और 4,800 नौकरियां तथा रत्नागिरी की 1,750 मेगावाट मे-वाटरफ्रंट परियोजना में ₹6,700 करोड़ निवेश और 1,600 रोजगार शामिल हैं। राज्य सरकार की नीति के अनुसार जलाशय उपयोग के लिए ₹11.33 लाख/मेगावाट/वर्ष किराया, औद्योगिक दरों पर जल शुल्क और प्रचलित दरों के अनुसार परिसर किराया निर्धारित किया गया है। जल उपयोग के लिए 19.29 टीएमसी प्रारंभिक भराव और 3.24 टीएमसी वार्षिक पुनर्भरण की आवश्यकता होगी, जिससे क्रमशः ₹1,762.21 करोड़ और ₹1,128.32 करोड़ का राजस्व सृजित होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सह्याद्रि पर्वतमाला और राज्य की विविध जैव भौगोलिक स्थितियां पंप स्टोरेज के लिए आदर्श हैं और महाराष्ट्र इस दिशा में 1 लाख मेगावाट दीर्घकालिक लक्ष्य की ओर अग्रसर है। यह पहल महाराष्ट्र को न केवल हरित ऊर्जा की दिशा में बल्कि आर्थिक और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी नई ऊंचाई पर ले जाएगी।




